अंबाला — किसी ज़माने  में मशहूर साहित्यकार और लेखक विलियम शेक्सपियर ने कहा था कि नाम में क्या रखा है. हालांकि आज के युग में हर  व्यक्ति के न केवल नाम का बल्कि वह नाम किस ढंग  से लिखा जाता है, उससे  भी बहुत फर्क पड़ता है और अगर कोई व्यक्ति सार्वजनिक जीवन में किसी  निर्वाचित या वैधानिक  पद पर आसीन हो, तो इस बात का महत्त्व और भी बढ़ जाता है कि उस व्यक्ति का वास्तव में आधिकारिक  एवं ओपचारिक नाम क्या है  ?
अम्बाला नगर निगम, जिसके नए सदन के गठन के  लिए इसी माह  10 मई को मतदान कराया गया एवं मतगणना 13 मई को सम्पन्न हुई में भाजपा  की महिला उम्मीदवार अक्षिता सैनी ने  स्थानीय नगर निगम की तीसरी सीधी निर्वाचित मेयर और पिछड़ा वर्ग – बी.सी. (बी) समाज से पहली महिला मेयर बनने  का  गौरव हासिल किया  है.
 वहीं अम्बाला नगर निगम क्षेत्र  के 20 वार्डों में से भाजपा ने 16 वार्डों  से जबकि कांग्रेस ने  3 वार्डों से और एक वार्ड नंबर 15 में निर्दलीय ने जीत हासिल की. हालांकि यह समाचार लिखे जाने तक हरियाणा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अम्बाला नगर निगम के सदन में नव-निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की निर्वाचन नोटिफिकेशन प्रदेश सरकार के गजट में प्रकाशित की जानी लंबित है.
इसी  बीच शहर निवासी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में एडवोकेट और म्युनिसिपल कानून जानकार हेमंत कुमार (9416887788) ने बताया कि हालांकि इस बार अम्बाला नगर निगम में कुल 20 वार्डों में से सात वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित थे, परन्तु इस बार कुल नौ वार्डो से महिला सदस्य ( जिन्हें आम तौर पर पार्षद/कोंसलर  कहा जाता है परन्तु हरियाणा नगर निगम कानून में ये शब्द नहीं है) निर्वाचित हुई. वार्ड नंबर 7 और वार्ड नंबर 16 हालांकि महिला आरक्षित वार्ड नहीं थे बावजूद इसके इन दोनों वार्डों से भी महिला न.नि. सदस्य निर्वाचित हुईं
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बहरहाल, हेमंत ने बताया कि गत दिवस  जब उन्होंने अम्बाला नगर निगम के   नव-निर्वाचित महिला  मेयर और 9 वार्डों से निर्वाचित महिला  न.नि. सदस्यों  की रिजल्ट-शीट में दर्शाए गये  उनके  नाम और मतदान से पूर्व उस महिला प्रत्याशी द्वारा नामांकन-फॉर्म के साथ संलग्न एफिडेविट (हलफनामे) में उनके द्वारा भरे गये नाम का आपस में  मिलान किया, तो उन्होंने पाया कि राज्य निर्वाचन आयोग की  वेबसाइट पर अपलोड सभी वार्डो की रिजल्ट-शीट में  केवल तीन वार्डों नामत: वार्ड 9 से  भाजपा के शिवानी अमन सूद, वार्ड 11 से भाजपा की कविता आशु सैनी और वार्ड 14 से कांग्रेस की पूनम विशु शर्मा के नाम के बीच उनके पति का नाम का उल्लेख किया जा रहा है हालांकि उक्त तीनों महिला प्रत्याशियों  द्वारा चुनाव से  पूर्व नामांकन फॉर्म के साथ संलग्न  एफिडेविट में उनके नाम के तौर पर  क्रमश: शिवानी सूद, कविता रानी और पूनम देवी का उल्लेख किया गया था. हालांकि उक्त  तीनो द्वारा मतदान से पूर्व  रिटर्निंग ऑफिसर (आर.ओ.) को किये गये आवेदन  में  मतपत्र (बैलट) पर उनके नाम के बीच उनके पति का नाम जोड़ने  की प्रार्थना की गई थी. वहीं 6 अन्य महिला सदस्यों नामत वरखा रानी सहोता ( वार्ड 2), अर्चना छिब्बर (वार्ड 6), मोनिका मल (वार्ड 7),  गुंजीत कौर (वार्ड 8), निकुंज (वार्ड 16) और सपना रानी (वार्ड 20) द्वारा मतपत्र में उनके नाम के बीच उनके पति का नाम शामिल करने बारे ऐसा  कोई आवेदन नहीं  किया गया था.
बहरहाल, हेमंत ने बताया कि कानूनन जिस नाम से  व्यक्ति ने किसी सार्वजनिक चुनाव  (पब्लिक  इलेक्शन) जैसा नगर निगम चुनाव  में अपना  नामांकन पत्र भरा हो, मतगणना पश्चात चुनाव जीतने के बाद   सम्बंधित रिटर्निंग ऑफिसर (आर.ओ.)  द्वारा उस व्यक्ति को  उसी नाम से  निर्वाचन प्रमाण-पत्र (इलेक्शन सर्टिफिकेट)  प्रदान किया जाता है, उसी  नाम से चुनाव  आयोग द्वारा उस व्यक्ति के  निर्वाचन  की गजट नोटिफिकेशन प्रकाशित होती  है एवं आम तौर पर वह व्यक्ति  उसी  नाम से पद और निष्ठा  की  शपथ ग्रहण करता है. उस पद पर रहते हुए वही नाम उस व्यक्ति का आधिकारिक नाम होता है.
इसी बीच हेमंत ने एक रोचक जानकारी देते हुए  बताया कि ने केवल अम्बाला नगर निगम की नव-निर्वाचित मेयर अक्षिता सैनी,  जो अपने  नाम के बीच पति का नाम शामिल नहीं करती है, बल्कि हरियाणा के 6 अन्य नगर निगमों नामत: फरीदाबाद में प्रवीण जोशी, गुरुग्राम में राज रानी, मानेसर में डॉ. इन्द्रजीत कौर, करनाल में रेणु बाला गुप्ता, पानीपत में कोमल सैनी और   यमुनानगर में सुमन बहमनी भी अपने अपने नाम में अपने पति का नाम शामिल नहीं करती हैं. अम्बाला नगर निगम की पूर्व मेयर शक्तिरानी शर्मा ( जो वर्तमान में कालका वि.स. हलके से भाजपा विधायक हैं ) ने भी न मेयर रहते और न अब विधायक होते हुए कभी  अपना नाम शक्तिरानी विनोद शर्मा नहीं लिखा.  हालांकि गत वर्ष मार्च, 2025 में अम्बाला नगर निगम के मेयर उपचुनाव में करीब 10 महीने के शेष  कार्यकाल के  लिए निर्वाचित  निर्वाचित  शैलजा सचदेवा हालांकि अपने नाम में अपने पति का नाम जोड़कर शैलजा संदीप सचदेवा ही लिखती थी.

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