कुरुक्षेत्र। “दिल खोलो, जीवन संवारो”, “सोच बदली तो जीवन बदला” और “तनाव को ताकत में बदलो”—इन प्रभावशाली महावाक्यों के साथ माउंट आबू मुख्यालय से पधारे काउंसलर एवं हैप्पीनेस कोच डॉ. सचिन परब ने एनआईटी ‌ थॉट लैब कुरुक्षेत्र में आयोजित व्याख्यान में उपस्थित जनसमूह को जीवन प्रबंधन की नई दिशा दी।
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के तत्वावधान में एनआईटी कुरुक्षेत्र के थॉट लैब में “क्वालिटी लाइफ मैनेजमेंट” विषय पर आयोजित इस ज्ञानवर्धक कार्यक्रम का संचालन एवं मार्गदर्शन थॉट लैब के समन्वयक प्रो. आर.के. अग्रवाल द्वारा किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में ब्रह्माकुमारी विश्व शांति धाम सेवा केंद्र की सेंटर इंचार्ज राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सरोज बहन जी और मेडिकल विंग के संयुक्त सचिव डॉ. सचिन परब का स्वागत पुस्तकें एवं शॉल भेंट कर किया । मुख्य वक्ता  डॉ. सचिन परब ने अपने प्रेरणादाई संबोधन में कहा कि आत्म-जागरूकता, भावनात्मक संतुलन एवं सकारात्मक सोच के माध्यम से जीवन को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने के सूत्र साझा किए। उन्होंने कहा कि व्यक्ति की अधिकांश समस्याओं का मूल कारण बाहरी परिस्थितियां नहीं, बल्कि उसके अपने विचार होते हैं।
उन्होंने संतुलित एवं शांतिपूर्ण जीवन के लिए आत्म-जागरूकता को अनिवार्य बताते हुए कार्य, परिवार और स्वास्थ्य के बीच सामंजस्य बनाए रखने पर जोर दिया। साथ ही “इमोशनल क्लॉट्स” की अवधारणा को समझाते हुए बताया कि भावनात्मक अवरोध समय के साथ शारीरिक बीमारियों का रूप ले सकते हैं।
डॉ. परब ने कहा, “यदि आप अपने दिल को भावनात्मक रूप से नहीं खोलेंगे, तो डॉक्टरों को उसे ऑपरेशन थिएटर में खोलना पड़ सकता है।” उन्होंने बताया कि भावनाओं को व्यक्त करना मानसिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है तथा आंसू तनाव हार्मोन को कम कर मन को हल्का करते हैं।
उन्होंने उपस्थित श्रोताओं को प्रेरित करते हुए कहा कि जीवन में तनाव को शक्ति में, दुख को सफलता में और घावों को उपलब्धियों में बदलना ही सच्चा जीवन प्रबंधन है। “लेटिंग गो” अर्थात नकारात्मकता और भावनात्मक बोझ को छोड़ने की कला पर भी विशेष रूप से प्रकाश डाला गया। उन्होंने उपस्थित सभी श्रोताओं को राजयोग मेडिटेशन की गहन अनुभूति करवाई।
इस अवसर पर सेंटर इंचार्ज राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सरोज दीदी जी के साथ बी के प्रियंका बहन, बी के निशा, बी‌ के अमिता, बी के संत कुमार, बी के केवल कृष्ण,बी के नरेश कुमार की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में डॉ. थान सिंह सैनी एवं डॉ. अंशु पराशर सहित बड़ी संख्या में शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे और सभी ने इस प्रेरणादायी सत्र का लाभ उठाया।
कार्यक्रम का समापन प्रोफेसर आर के अग्रवाल द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने ब्रह्माकुमारी संस्था , सभी अतिथियों एवं उपस्थित जन समूह का आभार व्यक्त किया ।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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