कला समाज का दर्पणः संयुक्त निदेशक सुखमीत सिंह
केयू में तीन दिवसीय कला प्रदर्शनी “उद्भव” का आयोजन
कुरुक्षेत्र, 6 अप्रैल।
 कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में ललित कला विभाग द्वारा 6 से 8 अप्रैल तक तीन दिवसीय कला प्रदर्शनी  “उद्भव” का उद्घाटन करते हुए हरियाणा के लोकल ऑडिट विभाग के संयुक्त निदेशक सुखमीत सिंह ने कहा कि कला समाज का दर्पण होती है और इसके माध्यम से कलाकार अपने विचारों तथा सामाजिक सरोकारों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत कर सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों की रचनात्मकता की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी प्रदर्शनियां युवा कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच प्रदान करती हैं और समाज को सोचने के लिए प्रेरित करती हैं।  इस प्रदर्शनी में विद्यार्थियों ने पेंटिंग, एप्लाइड आर्ट, मूर्तिकला तथा समकालीन कला के विभिन्न रूपों के माध्यम से अपनी रचनात्मक अभिव्यक्तियाँ प्रस्तुत कीं। प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य कला के माध्यम से सामाजिक सरोकारों को उजागर करना रहा।
लोकल ऑडिट विभाग के आरएसए भूपिंदर सिंह ने कहा कि कला समाज की संवेदनाओं और विचारों को अभिव्यक्त करने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी प्रदर्शनियां युवा कलाकारों को अपनी कला प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान करती हैं और समाज को सकारात्मक संदेश देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

ललित कला विभाग के अध्यक्ष डॉ. गुरचरण सिंह अतिथियों का स्वागत किसा और बताया कि विद्यार्थी खुशी पंचाल ने अपने कार्यों में स्वच्छता अभियान, सफाई कर्मियों के प्रति सम्मान तथा फेक न्यूज़ जैसे विषयों को प्रमुखता से उठाया। वहीं मनीषा रानी ने शतरंज के खेल को महाभारत काल से जोड़ते हुए पारंपरिक और आधुनिक कला का सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया। सानिया कुंडू ने भारतीय मिनिएचर कला को नए दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करते हुए पारंपरिक सौंदर्य और आधुनिक विचारों का संतुलित मेल दिखाया।
मूर्तिकला की छात्रा मंदीप ने अपने कार्यों में समाज में लड़कियों की स्थिति को केंद्र में रखते हुए शीशे और बहु-आकृतियों के प्रयोग से समाज की मानसिकता का प्रतीकात्मक दर्पण प्रस्तुत किया। डॉ. गुरचरण सिंह ने कहा कि “उद्भव” प्रदर्शनी विद्यार्थियों की कलात्मक प्रतिभा को प्रदर्शित करने के साथ-साथ सामाजिक मुद्दों पर संवाद स्थापित करने का एक सशक्त माध्यम भी बनी। इस अवसर पर विभाग के प्राध्यापकगण, विद्यार्थी तथा कला प्रेमी भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

 
केयू में ‘कुरुक्षेत्र‘ थ्रू द एजेस’ विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 8 से
कुरुक्षेत्र, 6 अप्रैल।
 कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग द्वारा 8 से 10 अप्रैल 2026 तक “कुरुक्षेत्रः थ्रू द एजेस” विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। यह सम्मेलन विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल में आयोजित होगा।
इस सम्मेलन का आयोजन श्रीमद्भगवद्गीता अध्ययन केंद्र, भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली तथा विजन कुरुक्षेत्र के सहयोग से किया जा रहा है। सम्मेलन में देश-विदेश के विद्वान, शोधकर्ता और विशेषज्ञ कुरुक्षेत्र के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व पर अपने शोधपत्र प्रस्तुत करेंगे।
अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के निदेशक प्रो. (डॉ.) भगत सिंह ने बताया कि इस सम्मेलन का उद्देश्य प्राचीन काल से लेकर आधुनिक समय तक कुरुक्षेत्र के ऐतिहासिक विकास, सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक परंपराओं पर व्यापक चर्चा करना है। कार्यक्रम में गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।  सम्मेलन के आयोजन सचिव प्रो. (डॉ.) आर.के. देसवाल ने बताया कि इस अवसर पर विभिन्न अकादमिक सत्रों, व्याख्यानों और शोधपत्र प्रस्तुतियों के माध्यम से कुरुक्षेत्र के बहुआयामी इतिहास को उजागर किया जाएगा। विजन कुरुक्षेत्र के अध्यक्ष मदन मोहन छाबड़ा भी इस आयोजन में विशेष सहयोग दे रहे हैं।
लोक सम्पर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया ने बताया कि तीन दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में देश-विदेश के अनेक विद्वानों और शोधार्थियों के भाग लेने की संभावना है, जिससे कुरुक्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर नई पहचान मिलेगी। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम से जुड़े ज्ञान सहयोगियों में स्वदेशी शोध संस्थान, अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना, जिओ गीता, हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, विजन कुरुक्षेत्र तथा श्री गुलजारी लाल नंदा नैतिकता, दर्शन, संग्रहालय एवं पुस्तकालय केंद्र शामिल हैं।

तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के लिए सलाहकार समिति
तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के मुख्य संरक्षक कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा होंगे। वहीं सम्मेलन के संरक्षकों में आईसीएचआर, नई दिल्ली के चेयरमैन प्रो. राघुवेन्द्र तंवर, स्वदेशी जागरण मंच के अखिल भारतीय सह-संगठक सतीश कुमार, हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, पंचकूला के वाइस-चेयरमैन डॉ. कुलदीप अग्निहोत्री, अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना, दिल्ली के अध्यक्ष प्रो. आई.एस. विश्वकर्मा तथा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. वीरेन्द्र पाल शामिल होंगे।
कार्यक्रम/आयोजन के लिए गठित सलाहकार समिति में विभिन्न शिक्षाविदों एवं विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। समिति के सदस्यों में प्रमुख रूप से प्रो. मंजुला चौधरी (निदेशक, दूरस्थ शिक्षा केंद्र, ज्ञन्ज्ञ), प्रो. कृष्णा रंगा (डीन, भारतीय अध्ययन संकाय), प्रो. राकेश कुमार (डीन, अकादमिक अफेयर्स, ज्ञन्ज्ञ), प्रो. शुचिस्मिता (निदेशक, श्री गुलजारी लाल नंदा सेंटर ऑफ एथिक्स), प्रो. ब्रजेश साहनी (डीन ऑफ कॉलेजेज, ), प्रो. संजीव शर्मा (अध्यक्ष, पुस्तकालय विज्ञान विभाग), प्रो. महासिंह पुनिया (निदेशक, जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान), प्रो. ए.आर. चौधरी (डीन, छात्र कल्याण), प्रो. जसबीर सिंह (डीन, फैकल्टी आफ लाइफ साइंस), प्रो. सुरेश कुमार (इलेक्ट्रॉनिक साइंस विभाग), प्रो. कुसुम (मुख्य वार्डन, गर्ल्स हॉस्टल), प्रो. राजपाल (एआईएच विभाग), डॉ. चेतन शर्मा (पुस्तकालयाध्यक्ष), प्रो. सुधीर रंगा (जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली), डॉ. आबिद अली (सहायक प्रोफेसर, जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान), डॉ. जितेंद्र खटकड़ (अध्यक्ष, सांख्यिकी विभाग), श्रीमती सरिता आर्या (एसोसिएट प्रोफेसर, करनाल) तथा डॉ. धर्मबीर (अध्यक्ष, इतिहास विभाग) शामिल हैं। यह समिति आयोजन के सफल संचालन, मार्गदर्शन एवं आवश्यक सुझाव प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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