चंडीगढ़। हरियाणा के राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के पांच विधायकों द्वारा क्रास वोटिंग और चार विधायकों के वोट रद होने के बाद पार्टी में अंदरूनी कलह तेज हो गई है। जुबानी जंग सिर्फ भाजपा बनाम कांग्रेस तक सीमित नहीं है, बल्कि कांग्रेस के भीतर भी खुला टकराव दिखने लगा है। पूरा मामला सिर्फ चुनावी नतीजे का नहीं, बल्कि राजनीतिक नैरेटिव सेट करने की जंग बन गया है। हर नेता अपने बयान के जरिए अपनी जमीन मजबूत करने और दूसरे को कमजोर करने की कोशिश में लगा है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह जुबानी जंग यहीं थमेगी, या आगे चलकर असली सियासी टूट में बदल जाएगी। संकेत साफ हैं, अब मुकाबला सिर्फ वोटों का नहीं, बल्कि शब्दों से बनने वाली राजनीति का भी है और यह जंग अभी लंबी चलने वाली है। सबसे तीखा बयान भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी सतीश नांदल की ओर से आया।
उन्होंने सीधे तौर पर इनेलो के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभय सिंह चौटाला और पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा को घेरते हुए कहा कि अगर उन्हें यह जानकारी है कि क्रास वोटिंग के लिए विधायकों को करोड़ों रुपये दिए गए, तो वे यह भी बताएं कि पैसा कहां से आया, किसने दिया और कैसे दिया गया। नांदल का यह बयान सिर्फ आरोप नहीं, बल्कि सीधी चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है, जिसने पूरे मामले को और ज्यादा राजनीतिक रंग दे दिया है।

वहीं, हुड्डा ने भी जवाबी हमला करते हुए इनेलो को भाजपा की ‘बी-टीम’ करार दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें यह तक पता नहीं था कि कांग्रेस के चार वोट रद हो जाएंगे। हुड्डा का यह बयान एक तरफ इनेलो पर निशाना है, तो दूसरी तरफ यह कांग्रेस के भीतर की स्थिति को भी उजागर करता है, जहां अपने ही वोटों को लेकर असमंजस बना रहा। इसके जवाब में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि पहली बार देखा कि कांग्रेस को अपने ही विधायकों पर भरोसा नहीं रहा और उसके वरिष्ठ नेता खुद पोलिंग एजेंट की भूमिका में नजर आए। यह स्थिति दिखाती है कि कांग्रेस का भविष्य कमजोर होता जा रहा है।

वहीं, कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव कुमारी सैलजा ने भी परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जीत अच्छी बात है, लेकिन जिस मार्जिन से जीत हुई, वह संतोषजनक नहीं है। रोचक पहलू यह है कि हुड्डा की तरह सैलजा के भी दो करीबी विधायकों पर क्रास वोटिंग के आरोप लगे हैं। बहरहाल, उनका बयान सीधे तौर पर पार्टी के भीतर की खामियों की ओर इशारा करता है और यह बताता है कि कांग्रेस के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है।

कांग्रेस विधायक कुलदीप वत्स और जुलाना विधायक विनेश फोगाट ने पार्टी के भीतर ‘जयचंद’ होने की बात कहकर माहौल को और गरमा दिया। उन्होंने कहा कि जब तक पार्टी में खुद को बड़ा मानने वाले नेताओं पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक हालात नहीं सुधरेंगे। नारायणगढ़ विधायक शैली चौधरी ने भी खुलकर कहा कि अगर आरोप गलत साबित होते हैं तो वे राजनीति छोड़ देंगी, लेकिन इस्तीफा नहीं देंगी, उनका फैसला जनता करेगी।

हथीन विधायक मोहम्मद इजराइल ने कहा कि उन्होंने ‘अंतरात्मा की आवाज’ पर वोट दिया और उन पर लगाए गए आरोप झूठे हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वे इस मुद्दे पर आगे अपने कार्यकर्ताओं से चर्चा करेंगे। इसी तरह जरनैल सिंह ने अलग ही रुख अपनाते हुए कहा कि कई विधायक खुद मुख्यमंत्री से मिलते हैं और काम करवाते हैं। उन्होंने नायब सैनी को काम करने वाला मुख्यमंत्री बताया, जो अपने आप में राजनीतिक संकेत देता है।

सद्भावना यात्रा निकाल रहे पूर्व सांसद व कांग्रेस नेता बृजेंद्र सिंह ने साफ कहा कि क्रास वोटिंग करने वाले विधायकों को पार्टी से बाहर किया जाना चाहिए, नहीं तो वे आगे भी ऐसा करते रहेंगे। यह बयान कांग्रेस नेतृत्व पर दबाव बढ़ाता है और ‘अनुशासन बनाम संख्या’ की बहस को और गहरा करता है।

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