श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में संस्कृत सप्ताह महोत्सव संपन्न

कुरुक्षेत्र, 8 अगस्त। श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के आयुर्वेद संहिता एवं सिद्धांत स्नातकोत्तर विभाग द्वारा आयोजित संस्कृत सप्ताह महोत्सव का शुक्रवार को समापन हुआ। महोत्सव के अंतिम दिन मुख्य वक्ता के रूप में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के आईआईएचएस के संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. रामचंद्र ने शिरकत की।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डॉ. रामचंद्र ने वैदिक ज्ञान, परंपरा एवं श्रावणी उपाकर्म विषय पर विशेष व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने वेदों की प्राचीनता, महत्व और उनके मंत्रों की सार्थकता को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि वेद केवल धार्मिक ग्रंथ ही नहीं, बल्कि मानव जीवन, समाज और प्रकृति के समग्र विकास के सूत्र प्रदान करते हैं। अपने संबोधन में उन्होंने वेदों में निहित मित्र भाव, समानता और समाज उन्नति के अनेक उदाहरण दिए।

डॉ. रामचंद्र ने शतपथ ब्राह्मण और छांदोग्य उपनिषद की विषयवस्तु का परिचय कराते हुए संस्कृत भाषा की वैज्ञानिकता और सरलता पर प्रकाश डाला। उन्होंने श्रावणी उपाकर्म पर्व की पौराणिक एवं सांस्कृतिक महत्व बताते हुए कहा कि यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि ज्ञान, अनुशासन और परंपरा के संरक्षण का प्रतीक है।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की आत्मा है। उन्होंने कहा कि वैदिक ज्ञान और आयुर्वेद का संबंध अटूट है और विश्वविद्यालय में ऐसे आयोजनों से छात्रों में पारंपरिक ज्ञान के प्रति रुचि बढ़ेगी।

आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान के प्राचार्य प्रो. आशीष मेहता ने संस्कृत के महत्व पर बोलते हुए कहा कि यह भाषा विज्ञान, चिकित्सा और दर्शन का आधार है। आयुर्वेद संहिता एवं सिद्धांत स्नातकोत्तर विभागाध्यक्ष प्रो. कृष्ण कुमार ने संस्कृत सप्ताह की गतिविधियों की जानकारी दी और संस्कृत क्लब की सचिव डॉ. सीमा रानी ने कार्यक्रम का संचालन किया।कार्यक्रम में शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही। 

By Dr. Rajesh Wadhwa

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