कुरुक्षेत्र 12 दिसंबर/अंतराष्ट्रीय गीता जंयती पर ज्योतिसर स्थित श्रीगिता कुंज आश्रम बद्रीनारायण मंदिर में गीता जंयती के मोक्षदा एकादशी के अवसर पर स्वामी मुक्तानंद जी महाराज एवं कुरुक्षेत्र जिला  सत्र  न्यायाधीश कंज्यूमर कोर्ट की डॉ नीलमा शांगला के द्वारा   हवन यज्ञ का आयोजन किया गया। स्वामी मुक्तानंद जी ने प्रवचन करते हुए कहा कि  मोक्षदा एकादशी तिथि पर ही द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत युद्ध के दौरान अपने शिष्य अर्जुन को गीता का उपदेश दिया। इस कारण हर साल से मार्गशिष की शुक्ल पक्ष की एकादशी पर गीता जंयती के तौर पर मनाया जाता है। यही एक ग्रंथ है जिस की जयंती मनाई जाती है, गीता के उपदेश में समस्त जीवन का सार छिपा है। डॉ नीलमा शांगल ने कहा कि कि यह हम सब के लिए ऐतिहासिक अवसर है। इस सुंदर और भव्य आयोजन में पहुंचे लोगों को उन्होंने बधाईयां व शुभकामनाएं देते हुए कहा कि गीता जयंती महोत्सव के इस ऐतिहासिक अवसर को भुलाया नहीं जा सकता। हजारों साल पहले कुरुक्षेत्र की भूमि पर भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था। यह गीता ज्ञान उस वक्त जितना उपयोगी था, आज भी उतना ही उपयोगी है। श्रीमदभगवद्गीता व्यवहार क्षेत्र में जीवन जीने की कला सिखाती है। वह बताती है कि हम कैसे अपने जीवन को गीता के आधार पर जीयें। हम जीवन में व्यवहार कैसे करें तथा अनुकूल प्रतिकूल परिस्थितियों में कैसे कार्य करें कि हम चिंता, शोक, तनाव एवं भय व अन्य विकारों से निजात पा सकें। डॉ नीलमा शांगला ने अंतरराष्ट्रीय श्रीमद्भगवद गीता जयंती  द्वारा आयोजित अठारह दिवसीय विश्व मंगल महायज्ञ एवं विविध कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर श्रीमद्भगवद्गीता जन्म स्थली ज्योतिसर बद्रीनारायण मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किये। इस मौके पर आचार्य योगेन्द्र एवं द्वारिका प्रसाद मिश्र द्वारा विधिवत पूजा अर्चना करवाई। इस अवसर पर कैलाश जी करनाल, प्रवीण गर्ग पानीपत, प्रवीण मित्तल करनाल,  सुधीर जिंदल, गुलजारी लाल गोयल, प्रीति मित्तल, प्रमोद कुमार आदी भक्तजन मौजूद रहे।
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कार्यकम में प्रवचन करते स्वामी मुक्तानंद जी महाराज।
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श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित करते स्वामी मुक्तानंद जी महाराज।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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