शैलर मालिकों की हड़ताल के चलते धान की सरकारी खरीद सुचारु रुप से नहीं हो सकी शुरु, किसान व व्यापारी परेशान
बाबैन, राकेश शर्मा
बाबैन, राकेश शर्मा
बाबैन अनाज मंडी में धान की सरकारी खरीद सुचारु रुप से शुरू न होने के कारण किसानों का पीला सोना कई दिनों से खुले आसमान के नीचे पड़ा है। किसानों के धान की खरीद व मंडी से उठान न होने के कारण जहां किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है वही आढ़तियों को भी किसानों के गुस्से का प्रकोप सहना पड़ रहा है। किसान मंडी में अपनी धान लेकर पहुंच रहे है लेकिन मंडी में जगह ना मिलने के कारण किसानों को धान उतारने के लिए कई-कई घंटों तक इंतजार करना पड़ रहा है। आलम ये है कि जहां भी नजर दौड़ाई जाए वही धान के कट्टे लगे हुए है जिसकी वजह से मंडी में जाम की स्थिति पैदा हो गई है। बाबैन मंडी में अब तक 1 लाख 90 हजार क्विंटल की आवक हो चुकी है जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 5 लाख 95 हजार 911 क्विंटल का था। मंडी में धान ना बिकने के कारण अधिकांश किसानों ने अपने खेतों में ही धान को रोका हुआ है। इस वर्ष बाबैन मंडी से अभी तक खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने केवल 26 हजार 400 क्विंटल व हैफेड ने 27 हजार 200 क्विंटल धान की ही सरकारी खरीद की है जो पिछले वर्ष के मुकाबले 10 गुना कम है।
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क्या कहते है मार्किट कमेटी सचिव
जब इस विषय को लेकर मार्किट कमेटी सचिव लव गुप्ता से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि शैलर मालिकों की हड़ताल के चलते मंडी से धान का उठाव नहीं हो पाया है। उन्होंने बताया कि सरकार इस मामले को लेकर काफी गंभीर है और जल्दी ही धान की खरीद की समस्या का समाधान करने के प्रयासरत्त है। उन्होंने कहा कि धान की खरीद को लेकर सभी संभव कदम उठाए जा रहे है ताकि किसानों को अपनी धान बेचने को लेकर कोई समस्या ना आए।
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क्या कहते है मंडी प्रधान
जब इस विषय को लेकर मंडी प्रधान जगदीश ढ़ीढरा से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि शैलर मालिकों द्वारा धान का उठान ना करने के कारण मंडी में धान जमा हो गया है। उन्होंने कहा कि शैलर मालिक 1 क्विंटल धान के बदले 62 किलो चावल देने पर अड़े हुए है जबकि सरकार 67 किलो चावल लेने पर अड़ी है। उन्होंने कहा कि शैलर मालिक पिछले 20 साल से अधिक समय से धान की कुटाई के रेट 10 रुपये प्रति क्विंटल को बढ़ा कर 100 रुपये प्रति क्विंटल की मांग कर रह है जिसको लेकर सरकार व शैलर मालिकों के बीच गतिरोध बना हुआ है। उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा कि सरकार शैलर मालिकों के साथ बातचीत कर समस्या का समाधान करें ताकि धान की फसल को लेकर किसानों व व्यापारियों को किसी समस्या से परेशान ना होना पड़े।
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क्या कहते है मार्किट कमेटी सचिव
जब इस विषय को लेकर मार्किट कमेटी सचिव लव गुप्ता से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि शैलर मालिकों की हड़ताल के चलते मंडी से धान का उठाव नहीं हो पाया है। उन्होंने बताया कि सरकार इस मामले को लेकर काफी गंभीर है और जल्दी ही धान की खरीद की समस्या का समाधान करने के प्रयासरत्त है। उन्होंने कहा कि धान की खरीद को लेकर सभी संभव कदम उठाए जा रहे है ताकि किसानों को अपनी धान बेचने को लेकर कोई समस्या ना आए।
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क्या कहते है मंडी प्रधान
जब इस विषय को लेकर मंडी प्रधान जगदीश ढ़ीढरा से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि शैलर मालिकों द्वारा धान का उठान ना करने के कारण मंडी में धान जमा हो गया है। उन्होंने कहा कि शैलर मालिक 1 क्विंटल धान के बदले 62 किलो चावल देने पर अड़े हुए है जबकि सरकार 67 किलो चावल लेने पर अड़ी है। उन्होंने कहा कि शैलर मालिक पिछले 20 साल से अधिक समय से धान की कुटाई के रेट 10 रुपये प्रति क्विंटल को बढ़ा कर 100 रुपये प्रति क्विंटल की मांग कर रह है जिसको लेकर सरकार व शैलर मालिकों के बीच गतिरोध बना हुआ है। उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा कि सरकार शैलर मालिकों के साथ बातचीत कर समस्या का समाधान करें ताकि धान की फसल को लेकर किसानों व व्यापारियों को किसी समस्या से परेशान ना होना पड़े।
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बाबैन मंडी में धान की खरीद व उठान न होने से बाबैन अनाज मंडी में जमा धान की बोरियां।
