ब्रह्माकुमारीज : विश्व शांति धाम सेवा केंद्र में मनाया स्मृति दिवस
कुरुक्षेत्र।
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के संस्थापक पिताश्री ब्रह्मा बाबा की 55वीं पुण्यतिथि स्मृति दिवस के रूप में विश्व शांति धाम सेवा केंद्र कुरुक्षेत्र में योग साधना के साथ प्रारंभ हुई। इस  दौरान सेवा केंद्र के सभी नियमित बी.के भाई -बहनों ने दिनभर योग साधना करते हुए पिताश्री के जीवन प्रसंगों को याद करते हुए अपनी आत्मा में निहित जीवन मूल्यों रूपी रत्नों को पहचान कर लक्ष्य प्राप्ति का संकल्प धारण किया। सेंटर इंचार्ज राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सरोज बहन ने बताया कि पुण्य स्मृति दिवस हमें अव्यक्त बनने और उच्च पुरुषार्थ करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने बताया कि कैसे ब्रह्मा बाबा ने तन- मन -धन सब कुछ शिव बाबा को अर्पण किया। जिनके प्रति हमारा आदर और प्यार होता है, उसकी हर बात सहज स्वीकार हो जाती है। प्रजापिता ब्रह्मा बाबा ने स्वयं को त्याग, तपस्या की साक्षात मूर्त बना कर अनेकानेक मनुष्यों के मन में विश्व कल्याण की भावना के बीज बोए, जो वट वृक्ष की तरह विश्व में फली भूत हो रहे हैं। नन्ही बी.के गौरी ने शत शत नमन हमारा गीत के माध्यम से बाबा के दिव्य गुणों का बखान किया। इसी के साथ  प्रोजेक्ट पर बाबा के जीवन की कुछ झलकियां दिखा कर ड्रामा के माध्यम से शांति, प्रेम, सात्विक भोजन और हर प्रकार की सेवा करने का संदेश देते हुए आध्यात्मिक शक्ति का महत्व बताया। चंडीगढ़ से पधारे बी.के अरुण भाई ने कहा कि 2023 बीत गया, पर क्या हमें कुछ याद है। अब हमने एक कदम 2024 में आगे बढ़ाया है और हमारा लक्ष्य ऊंचा है, परंतु हमारे कदम छोटे-छोटे है। वर्तमान संसार में बदल रहे हालात को देखते हुए मनोबल को बढ़ाने के लिए राजयोग का नियमित अभ्यास करना जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि 18 जनवरी का दिन संकल्प करने का शुभ दिन है। हमें सर्वगुण संपन्न बनने के लिए गुणों को धारण करना पड़ेगा क्योंकि इस समय चारों तरफ भ्रष्टाचार, पाप, चोरी, दुराचार आदि अनेक विकारों का राज्य फैला हुआ है। उन्होंने पिता श्री ब्रह्मा बाबा के साथ बिताए साकार अनुभवों को सांझा करते हुए कहा कि कितने भी बड़े बन जाओ, पर दिमाग से बड़ा नहीं बनना अर्थात अभिमान नहीं करना। हम ब्रह्मा बाबा की श्रीमत का अनुसरण करेंगे, तभी मनुष्य से देवता बनेंगे। उन्होंने कहा कि अपने लिए नहीं जीना, विश्व कल्याण के लिए जीना है क्योंकि विश्व परिवर्तन का कार्य भगवान के द्वारा चल रहा है। अंत में उन्होंने संदेश दिया कि हम बदलेंगे, जन बदलेगा-यही सच्चा सच्चा स्मृति दिवस मनाना है। बी.के गौरव और पेहुल ने गीत के माध्यम से  शांतिदूत बाबा की पहचान बता कर शांति का पाठ पढ़ाया। इस मौके पर बी.के अमित, गौरव, जगदीश, केवल कृष्ण, मुकेश, जसवीर, राजेश, डॉ आर.डी शर्मा, हरबंस सिंह औजला, संत कुमार, रघुवीर सिंह, निर्मल सैनी, जरनैल, हीरा देवी, सुमन, माला, मनजीत, विमला, नीलम, लता, गीता, सुनीता मित्तल आदि अनेक बहन -भाई मौजूद रहे।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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