Category: National

चिप्स की जंग में भारत की एंट्री

(सेमीकंडक्टर सहयोग और बदलती वैश्विक रणनीति) डॉ. प्रियंका सौरभ भारत और अमेरिका के बीच सेमीकंडक्टर तथा उन्नत तकनीकी सहयोग को लेकर हुआ हालिया करार केवल एक द्विपक्षीय समझौता नहीं है,…

रफ्तार की कीमत: सड़क पर बुझता युवाओं का भविष्य

सड़क हादसे केवल दुर्घटनाएँ नहीं, बल्कि हमारी लापरवाही और गैर-जिम्मेदार सोच का परिणाम हैं। तेज़ रफ्तार, नशे में ड्राइविंग और मोबाइल का इस्तेमाल युवाओं की ज़िंदगी निगल रहा है। नियमों…

शिक्षण संस्थानों में फूहड़ मनोरंजन : शिक्षा और मर्यादा पर बढ़ता राष्ट्रीय प्रश्न

(डीजे संस्कृति और अशोभनीय प्रस्तुतियों के बीच बच्चों के संस्कार, अनुशासन और शिक्षा के मूल उद्देश्य पर गंभीर चिंता) -डॉ. प्रियंका सौरभ विद्यालय किसी भी राष्ट्र की आत्मा का निर्माण…

कोविड टीका और हृदयाघात: अफ़वाहों के शोर में दबता विज्ञान

-डॉ. सत्यवान सौरभ भारत में कोविड महामारी के बाद यदि कोई भय सबसे तेज़ी से समाज में फैला है, तो वह है—कोविड टीकों और हृदयाघात के बीच कथित संबंध। सोशल…

ढाका में बदलाव की हवा, भारत के सामने नई कसौटी

(सत्रह वर्षों बाद सत्ता में लौटी बीएनपी ने बांग्लादेश की राजनीति की दिशा बदली है; भारत के सामने अब अवसरों के साथ नई अनिश्चितताएँ भी खड़ी हैं।) — डॉ. प्रियंका…

ट्रेड डील सहित अन्य मुद्दों को लेकर कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ किया विरोध प्रदर्शन, सौंपा ज्ञापन             

करनाल, 16 फरवरी  : करनाल में जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा विभिन्न जनसमस्याओं व मुद्दों को लेकर भाजपा सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया। यह प्रदर्शन ट्रेड डील, बुढ़ापा पेंशन…

चुनाव के बाद चुप्पी: क्या राइट टू रिकॉल समय की मांग है?

—डॉo सत्यवान सौरभ लोकतंत्र का मूल सिद्धांत यह है कि सत्ता जनता के हाथों में निहित होती है और निर्वाचित प्रतिनिधि जनता के सेवक होते हैं। चुनाव इसी व्यवस्था का सबसे…

कोचिंग संस्कृति और बच्चों की मौतें: सफलता के नाम पर असफल समाज

– डॉ० प्रियंका सौरभ कोटा में एक और छात्रा की आत्महत्या—यह कोई साधारण खबर नहीं है और न ही किसी एक परिवार की निजी त्रासदी भर। यह उस शिक्षा व्यवस्था,…

क्यों गायब हो रहे बच्चे?

(हरियाणा में हर दिन औसतन 12 बच्चे लापता—क्या यह सिर्फ गुमशुदगी है या संगठित मानव तस्करी का खामोश जाल?) घर से निकले बच्चे जब वापस नहीं लौटते, तो सवाल सिर्फ…

प्रकृति, पैसा और स्वास्थ्य: एक संतुलित दृष्टि

– डॉ० प्रियंका सौरभ आज के दौर में स्वास्थ्य को लेकर हमारी सोच तेजी से बदली है। आधुनिक जीवनशैली, तकनीक, महंगी चिकित्सा सुविधाएँ और बढ़ती आय ने यह विश्वास पैदा…