2047 के समृद्ध भारत का लक्ष्य 140 करोड़ भारतीयों का दृढ़ संकल्पः नायब सिंह सैनी
2047 के समृद्ध भारत का लक्ष्य 140 करोड़ भारतीयों का दृढ़ संकल्पः नायब सिंह सैनी कृषि क्षेत्र में रोजगार की अपार संभावनाएंः विक्रम साहनी हरियाणा का भारत की अर्थव्यवस्था में…
2047 के समृद्ध भारत का लक्ष्य 140 करोड़ भारतीयों का दृढ़ संकल्पः नायब सिंह सैनी कृषि क्षेत्र में रोजगार की अपार संभावनाएंः विक्रम साहनी हरियाणा का भारत की अर्थव्यवस्था में…
प्राइवेट स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन ने वीरवार को विभिन्न स्कूल को प्राचार्यों व शिक्षकों के साथ अपनी जायज मांगों को पूरा करवाने के लिए भिवानी के जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय…
संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में हरियाणवी युवा पिछले कई सालों से शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। साल 2024 में हुई यूपीएससी की परीक्षा में जहां हरियाणा मूल…
हरियाणा में स्कूल बैग नीति-2020 के नियम गैर-सरकारी व सरकारी स्कूलों के लिए बनाए गए हैं। इस नीति के अनुसार कक्षा पहली से 10वीं तक के विद्यार्थियों के लिए स्कूल…
-कुलपति प्रो. करतार सिंह धीमान ने दिए निर्देश,जल्द जारी किए जाएंगे कुरुक्षेत्र, 23 अप्रैल। श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय प्रशासन ने विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने…
पुस्तकें हमें अपनी सभ्यता एवं संस्कृति से जोड़ती हैं : प्रो. संजीव शर्मा केयू पंजाबी विभाग में ’उस्ताती ए कवि साईं मियां मीर जी’ पुस्तक पर व्याख्यान आयोजित कुरुक्षेत्र, 23…
कुरुक्षेत्र, 21 अप्रैल। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में परीक्षा शाखा द्वारा 8 परीक्षाओं के परिणाम घोषित किए गए हैं। परीक्षा नियंत्रक डॉ. अंकेश्वर प्रकाश ने बताया…
केयू में रोस्ट्रम प्रतियोगिता- वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित कुरुक्षेत्र, 21 अप्रैल। भावाभिव्यक्ति में मौलिकता एवं स्पष्टता एक अच्छे वक्ता की पहचान है। इसके साथ ही भावों की अभिव्यक्ति इस प्रकार…
यूनेस्को की पहल से भारतीय सांस्कृतिक विरासत की विश्व में बढ़ेगी पहचान 19 अप्रैल: श्रीमद्भगवद् गीता एवं भरतमुनि नाट्यशास्त्र को यूनेस्को की 74 डॉक्यूमेंट्री हेरिटेज कलैक्शन में शामिल करना वास्तव में भारतीय ज्ञान परंपरा का सम्मान है। यह उद्गार संस्कृति प्रेमी एवं लोक सांस्कृतिक विरासत के संरक्षक प्रो. महासिंह पूनिया ने यूनेस्को द्वारा पांडुलिपियों की पंजीकृत सूची में भारतीय ज्ञान परंपरा के दोनों ग्रन्थों को शामिल करने के पश्चात कहे। उन्होंने कहा कि गीता एक ऐसा ग्रन्थ है जिस का विश्व की लगभग सभी भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। भरतमुनि नाट्यशास्त्र सांस्कृतिक दृष्टि से भारतीय परंपरा एवं सांस्कृतिक इतिहास का का एक ऐसा ग्रन्थ है जिस को विद्वानों ने पांचवे वेद की संज्ञा दी है। समस्त भारतवासियों के लिए यह गौरवमयी उपलब्धि है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा किया गया यह प्रयास वैश्विक स्तर पर गीता एवं नाट्यशास्त्र की गरिमा को नई पहचान देगा। यह पहचान हर उस भारतीय की है जो भारत की ज्ञान परंपरा पर गर्व एवं गौरव महसूस करता है। इस उपलब्धि पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के प्रो. महासिंह पूनिया ने बताया कि श्रीमद्भगवद् गीता के 18 अध्यायों में जीवन का सार है। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा के अनुसार गीता का स्थान वही है जो उपनिषद एवं धर्मसूत्रों का है। उपनिषदों को जहां गायं कहा गया है वहीं पर गीता को उसके दुग्धरूपी सार की संज्ञा प्रदान की गई है। उन्होंने कहा कि उपनिषदों की जो अध्यात्म विद्या थी उसी को गीता में प्रस्तुत कर पूरे विश्व को एक ऐसा ग्रन्थ मिला है जो सब के लिए अनुकरणीय है। डॉ. पूनिया ने बताया कि भरतमुनि का नाट्यशास्त्र जो प्रदर्शन कलाओं पर एक प्राचीन ग्रन्थ है। यह ग्रन्थ 36 अध्यायों में विभाजित है। इस ग्रन्थ में नाटक के अभिनय, रस, संगीत और मंचन पर विस्तार से चर्चा की गई है। लोकजीवन में इसे पांचवे वेद की संज्ञा भी दी गई है। दोनों ही ग्रन्थों का यूनेस्को की पांडुलिपि ग्रन्थ सूची में शामिल होना प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व का अवसर है। उन्होंने कहा कि संस्कृति मंत्रालय द्वारा की गई यह पहल आने वाले दिनों में भारतीय सांस्कृतिक एवं ज्ञान परंपरा के क्षेत्र में नये आयाम स्थापित करेगी।
-भारत को “विश्वगुरु” बनाने में आयुर्वेदाचार्य की अहम भूमिका: वैद्य कोटेचा -श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय का पहला दीक्षांत समारोह संपन्न, 126 चिकित्सकों को मिली डिग्री, 26 को गोल्ड मेडल -पद्मभूषण राजवैद्य…