भारतीय संस्कृति के वाहक बनकर समाज में बढ़ाएं संस्कृति का व्याप: दुसी रामकृष्ण राव
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विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान की कार्यकारिणी एवं महासमिति बैठक सम्पन्न

कुरुक्षेत्र, 6 मार्च। विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान की कार्यकारिणी एवं महासमिति बैठक संस्थान के प्रज्ञा सदन में सम्पन्न हुई। बैठक में संपूर्ण देश से 35 प्रतिनिधि उपस्थित रहे। बैठक का शुभारम्भ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। मंचासीन विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के अध्यक्ष दुसी रामकृष्ण राव, विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान के अध्यक्ष डॉ. ललित बिहारी गोस्वामी, संगठन सचिव गोविन्द चन्द्र मोहंत, सचिव वासुदेव प्रजापति, अवनीश भटनागर, यतीन्द्र शर्मा, संस्थान के निदेशक डॉ. रामेन्द्र सिंह, सं.बो.परियोजना के विषय संयोजक दुर्ग सिंह राजपुरोहित रहे। देशभर से आए प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए दुसी रामकृष्ण राव ने कहा कि संस्कृति के प्रति निष्ठा बढ़ाने के लिए अभी समाज में बहुत कुछ करना बाकी है। समाज में भारतीय संस्कृति का व्याप बढ़ाने के लिए मंदिरों के ट्रस्टियों तथा मातृशक्ति का सहयोग लिया जा सकता है। संस्कृति के प्रचारक बनकर जो इस क्षेत्र में कार्य कर सकें उनका स्वागत है। संस्कृति के व्याप हेतु उन्होंने समाज में सेवा अभियान को भी महती आवश्यकता बताया। क्षेत्र संयोजक इस पर खुले मन से विचार कर आवश्यक सहयोग दे सकते हैं।
संस्थान के निदेशक डॉ. रामेन्द्र सिंह ने देशभर से आए संस्कृति बोध परियोजना से जुड़े प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र आध्यात्मिक, धार्मिक और शिक्षा का केन्द्र है। इसी पावन धरा पर भगवान श्री कृष्ण ने सबसे पहले पवित्र ग्रंथ गीता में वसुधैव कुटम्बकम् का संदेश दिया। संपूर्ण देश से संस्कृति वाहक के रूप में यहां पधारकर सभी प्रतिनिधियों ने निर्बाध कर्मठता का परिचय दिया है। उन्होंने पी.पी.टी. के माध्यम से बताया कि इस सत्र में संपूर्ण देश से लगभग 22 लाख छात्रों एवं अध्यापकों ने भारतीय संस्कृति का पाठ पढ़ा, इसे जाना। उन्होंने संस्कृति बोध अभियान, संस्कृति प्रवाह परीक्षा, अखिल भारतीय छात्र एवं आचार्य निबन्ध प्रतियोगिता, प्रकाशन विभाग, साहित्य बिक्री केन्द्र, अखिल भारतीय संस्कृति महोत्सव एवं संस्थान के कार्यक्रम एवं बैठकों को पी.पी.टी. में विस्तार से बताया। इस वर्ष संस्कृति बोधमाला पुस्तक पुनर्लेखन का भी महत्वपूर्ण कार्य किया गया है, जिसके अन्तर्गत 6 कार्यशालाएं आयोजित की गईं। संस्थान के सचिव वासुदेव प्रजापति ने गत वर्ष की बैठक की कार्यवाही का वाचन किया। इसके अतिरिक्त अनुवर्ती कार्यवाही की समीक्षा, वार्षिक प्रतिवेदन सत्र का प्रस्तुतिकरण किया गया। संस्थान के कोषाध्यक्ष डॉ. ज्वाला प्रसाद ने 1 अप्रैल 2023 से मार्च 2024 तक का आय-व्यय विवरण प्रस्तुत किया तथा सत्र 2024-25 हेतु प्रस्तावित अर्थ संकल्प (बजट) पर विचार के साथ-साथ आगामी वर्ष की कार्य योजना पर भी विचार किया गया। बैठक में हरियाणा, पंजाब, पूर्वी एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, बिहार, झारखंड, केरल, असम, छत्तीसगढ़, कर्नाटक तथा दूर-दराज क्षेत्रों से संस्कृति बोध परियोजना से जुड़े प्रतिनिधियों ने प्रतिभागिता की।

फोटो: 01, 02: विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान की कार्यकारिणी एवं महासमिति बैठक में भाग लेते देशभर से आए प्रतिनिधि।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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