कुरुक्षेत्र, जिले में पराली जलाने की घटनाओ पर अंकुश लगाते हुये कृषि विभाग की मेहनत इस सीजन मे रंग लाई है और इसके परिणामस्वरुप किसान वर्ग अब पराली प्रबंधन की ओर अपना रुख कर रहा है। कुरुक्षेत्र के डिप्टी डायरेक्टर एग्रीकल्चर (डीडीए) डा0 सुरेन्द्र सिंह मलिक ने अपने कार्यालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान इस प्रोजेक्ट पर प्रकाश डालते हुये बताया कि पराली जलाने की घटनाओं में आई कमी का सबसे बड़ा कारण किसान वर्ग की पराली प्रबंधन के प्रति सजगता है। आंकड़े पेश करते हुये उन्होंनें बताया कि गत वर्ष की तुलना इस वर्ष इन मामलों में 50 फीसदी की व्यापक कमी आई है। गत वर्ष पराली जलाने के 300 मामले दर्ज हुये थे जो कि इस सीजन में घटकर मात्र 154 रह गये हैं। हालांकि जहां जहां पराली जलाई गई है वहीं किसानों पर कानूनी कार्यवाही की गई है जिसके चलते   कृषि विभाग ने 2,32,500 रुपये का जुर्माना भी वसूला है। इसके अलावा जिले के 24078 किसानों ने सी0आर0एम0 पोर्टल पर पंजीकरण करवाया है, जिसकी प्रोत्साहन राशि लगभग 20 करोड़ रू0 बनती है।

डा0 सुरेन्द्र मलिक ने बताया कि इस समूचे अभियान में कृषि विभाग के 100 अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ मिलकर डिलोएट इंडिया ने अपनी सक्रिय भूमिका निभाते हुुये यह जटिल राह आसान की है। उन्होंने बताया कि इस संस्था के पूरे जिले में 32 लोगों की टीम ने कृषि विभाग के सहयोग से कुल 71 रेड और येलो चिन्हित संवेदनशील गांवों के किसानों को जागरूक कर इस अभियान को बल दिया है। इस मुहिम के तहत जिले के लगभग 14000 किसानों को जागरुक करने की बीड़ा उठाया गया था। किसानों को बताया गया कि पराली जलाने से न केवल भूमि का उपजाऊपन खत्म हो जाता है बल्कि आसपास के क्षेत्रों के लोगों की सेहत को भी हानि पहुंचती है। खरीफ की फसल कटाई के दौरान किसान अपनी अगली फसल को उगाने के लिये कई जटील समस्याओं का सामना करते हैं, जिसकी वजह से किसान खेत में आग लगाने के उपाय को सरल समझते है।
कृषि विभाग ने डिलोएट इंडिया की ओर से अगुवाई कर रहे आरती, सागर कम्बोज, दीपक शर्मा और हरमोनजोत सिंह और उनकी टीम के अथक प्रयासों को सराहा है।  संस्था ने किसानों की राह आसान बनाने के लिये तीन ट्रेक्टर, हे-रेक और बेलर उपलब्ध करवा उन्हें निशुल्क सेवा प्रदान की है। विशेष रूप से विकसित की गई किसान और उद्योग मैत्री एप्प से दोनों वर्ग को सहुलियत प्रदान की गई जिससे की किसान अपनी पराली उद्योगों में बेच सके।
सुरेन्द्र सिंह मलिक ने बताया कि इस प्रोजेक्ट में एक चुनौती जो उन्हें देखने को मिली, जिले में बड़े स्तर के उद्योगों की कमी जहां पराली को ईधन के रुप में इस्तेमाल में लाया जा सके। पराली से उत्पन्न उर्जा ईंटें, न्यूजप्रिंट यहां तक की सीएनजी बनाने के उपयोग में लाई जा रही है। यह प्रयास किसानों को आर्थिक मजबूती देने के साथ साथ उर्जा का एक और स्रोत उत्पन्न करने में कारगर साबित हो रहा है।
कृषि विभाग के उप कृषि निदेशक ने बताया कि कृषि विभाग के जिले के सभी सात खण्डों में सात नोडल अधिकारियों को नियुक्त किया गया था। उन्हें प्रतिदिन कृषि विभाग की टीम तहसीलदार, बी0डी0पी0ओ और पुलिस की सहायता से प्रतिदिन फ्लैग मार्च निकाला। डिलोएट इंडिया की तरफ से इस अभियान के लिए 11 गाडियाँ दो महीनों के लिए कृषि विभाग को उपलब्ध करवाई गई थी।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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