कुरुक्षेत्र, 18 अक्टूबर। कमोदा स्थित श्री काम्यकेश्वर महादेव मंदिर एवं तीर्थ पर आश्विन माह की महा सप्तमी के पावन उपलक्ष्य में आयोजित रविवारीय शुक्ला सप्तमी पर श्रद्धालुओं ने श्रद्धा की डुबकी लगाई। श्रद्धालुओं ने श्री काम्यकेश्वर महादेव का अभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। तीर्थ पर सुबह ही श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई थी। देर सायं तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। श्रीजयराम संस्थाओं के अध्यक्ष श्री ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी जी महाराज ने यज्ञ में पूर्णाहुति डाली। जयराम संस्था और गांव वासियों के सहयोग से मंदिर में भंडारे का भी आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने मोक्ष के लिए स्नान किया और दान-दक्षिणा दी। मंदिर को लड़ियों से सजाया गया थी और तीर्थ को स्वच्छ जल के साथ भरा गया था। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महा सप्तमी पर तीर्थ स्नान, दान और पूजा-अर्चना करने से दीर्घायु एवं आरोग्य की प्राप्ति होती है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
ग्रामीण सुमिंद्र शास्त्री ने कहा कि नवरात्र के पावन अवसर पर पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में मां कालरात्रि की पूजा का विधान बताया गया है, जिसे महा सप्तमी को पुत्र सप्तमी भी कहा जाता है। इस दिन व्रत रखने से संतान सुख की प्राप्ति होती है। श्रद्धालु इस अवसर पर भगवान शिव और मां दुर्गा की आराधना कर परिवार की सुख-समृद्धि एवं कल्याण की कामना करते हैं। मान्यता है कि रविवारीय शुक्ला सप्तमी के दिन तीर्थ में स्नान करने से मोक्ष व पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है। वामन पुराण के अध्याय 2 के 34 वें श्लोक के काम्यकवन तीर्थ प्रसंग में स्पष्ट लिखा है कि रविवार को सूर्य भगवान पूषा नाम से साक्षात रूप से विद्यमान रहते हैं।
ग्रामीण सुमिंद्र शास्त्री ने बताया कि इसी पावन धरा पर पांडवों को सांत्वना एवं धर्मोपदेश देने हेतु महर्षि वेदव्यास जी, महर्षि लोमहर्षण जी, नीतिवेता विदुर जी, देवर्षि नारद जी, वृहदश्र्व जी, संजय एवं महर्षि मार्कंडेय जी पधारे थे।
इस अवसर पर सुरेंद्र गुप्ता, रोहित कौशिक, सतबीर कौशिक, ब्लॉक समिति थानेसर के पूर्व चेयरमैन देवीदयाल शर्मा, लाल चंद, जोगिंद्र मास्टर, हरदीप सिंह, वकील, शीशपाल शर्मा, नरेश शर्मा, नित्यानंद शास्त्री, सोनू, आशीष, यश, मोनू पवन शर्मा, पंकज शर्मा, जितेन्द्र शर्मा और एकांत शर्मा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
