कुरुक्षेत्र, 13 जुलाई। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मैनेजमेंट तथा यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (एमएमटीटीसी) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित चार-सप्ताहीय फैकल्टी इंडक्शन प्रोग्राम के 10वें दिन विभिन्न विषयों पर आधारित चार अकादमिक सत्रों का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। कार्यक्रम समन्वयक एवं यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के अध्यक्ष प्रो. अनिल कुमार मित्तल ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य नव नियुक्त शिक्षकों में शोध, शिक्षण, नेतृत्व तथा व्यक्तित्व विकास से जुड़े आवश्यक कौशलों का विकास करना है, ताकि वे बदलते शैक्षणिक परिवेश में प्रभावी भूमिका निभा सकें।

कार्यक्रम के प्रथम सत्र में प्रतिभागियों के शोध कार्यों का मूल्यांकन किया गया। इस सत्र की अध्यक्षता प्रो. अनिल कुमार मित्तल ने की। छह प्रतिभागियों ने अपने शोध विषयों पर प्रस्तुतियां दीं, जिनमें कचरा प्रबंधन, ट्यूबरक्लोसिस, बलवन द्वारा प्रतिपादित राजत्व का सिद्धांत, भारतीय शिक्षा में मूक शिक्षा, ग्राम सभा तथा श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का दर्शन जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे। विषय विशेषज्ञों ने प्रस्तुतियों का मूल्यांकन करते हुए प्रतिभागियों को शोध की गुणवत्ता और प्रस्तुतीकरण कौशल को बेहतर बनाने संबंधी सुझाव दिए।
द्वितीय सत्र में टेक्नोलॉजिकल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्सटाइल एंड साइंसेज, भिवानी के प्रबंधन अध्ययन विभाग की विभागाध्यक्ष एवं सहायक प्रोफेसर डॉ. मोनिका शर्मा ने “भावनात्मक विकास एवं परामर्श” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षकों के लिए भावनात्मक बुद्धिमत्ता उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी विषयगत विशेषज्ञता। उन्होंने प्रतिभागियों को भावनात्मक संतुलन बनाए रखने, प्रभावी संवाद स्थापित करने तथा परामर्श के नैतिक सिद्धांतों की जानकारी दी।
दोपहर बाद आयोजित तृतीय सत्र में केरल विश्वविद्यालय, तिरुवनंतपुरम के वरिष्ठ प्रोफेसर आर. वसंतगोपाल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के परिप्रेक्ष्य में उच्च शिक्षण संस्थानों में अनुसंधान संस्कृति को मजबूत करने, अनुसंधान नैतिकता, डिजिटल अनुसंधान उपकरणों के उपयोग तथा नवाचार को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने शिक्षण और अनुसंधान के बीच संतुलन स्थापित करने को एक सफल शिक्षक की प्रमुख विशेषता बताया।
चतुर्थ एवं अंतिम सत्र में प्रो. आर. वसंतगोपाल ने “नेतृत्व कौशल” विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि प्रभावी नेतृत्व किसी भी शैक्षणिक संस्थान की प्रगति का आधार होता है। उन्होंने नेतृत्व की विभिन्न शैलियों, संस्थागत विकास में नेतृत्व की भूमिका तथा शिक्षकों में नेतृत्व क्षमता विकसित करने की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि एक अच्छा नेता सहयोगात्मक वातावरण तैयार कर नवाचार और सकारात्मक कार्य संस्कृति को बढ़ावा देता है।
कार्यक्रम के अंत में आयोजन समिति ने सभी रिसोर्स पर्सन्स और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के सफल संचालन में फैकल्टी इंडक्शन प्रोग्राम के समन्वयक प्रो. अनिल कुमार मित्तल तथा सह-समन्वयक डॉ. भंवर सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

By Dr. Rajesh Wadhwa

778-779, Partap Colony, Railway Road, Near Rudra Cinema, Opp Chaat King India Row, Kurukshetra 136118 Mob. 9896352867, 9467040367

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *