करनाल, 8 जुलाई (): महाकाल स्वामी कैलाशपुरी जी ने कहा है कि अयोध्या में भगवान श्रीराम मंदिर में हुई करोड़ो की चोरी में सीधे सीधे चपत राय ही नही बल्कि भाजपा सरकार भी जिम्मेदार है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जो भी भगवान श्रीराम के घर मे लूट के जिम्मेदार है उन्हें सजा मिलना तय है। जिन लोगो को बचाने की कोशिशें की जा रही है। उन्हें भगवान शिव शंकर का कोपभाजन बनने से कोई नही रोक सकता। सरकार कुछ भी कर ले मर्यादा पुरुषोत्तम सत्य को बाहर ले कर ही आंएगे। सबको समझ आना चाहिए कि शरीर छोड़ते समय कुछ साथ नही जाता केवल कर्मो के आधार पर ही अगले जन्म तय होते है।मगर भगवान श्रीराम के घर मे चोरी करके सबसे बड़ा पाप किया गया है। भगवान श्रीराम के घर को एक संगठन के हाथों में सोपने की बजाए यदि तपस्वियों और महान सन्तो के साथ सभी वर्गों के लोगो को जोड़ा जाता यो आज ये दिन ना देखना पड़ता। उन्होंने कहा कि चोरी तो पहले दिन से ही हो रही थी। सरकार और जिम्मेदार लोग तो आंखें मूंद कर बैठे थे।मगर अब भगवान श्रीराम ने इसे स्वयं उजागर किया है। विपक्ष भी इस मुद्दे पर केवल राजनीति ना करे। उन्हें सिद्धान्तों और सच की बात करनी चाहिए।सरकार भी इस मामले में जिम्मेदार है। यदि दोषियों को सरकार ने बचाया तो इसके गंभीर परिणाम उन्हें भी भुगतने के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने कहा है कि वह खुद अयोध्या में भगवान श्रीराम मंदिर में डमरू नाथ बजा कर आये थे। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे पवित्र धाम से जुड़ी कथित चोरी की घटना ने देशभर के संत समाज और राम भक्तों को व्यथित कर दिया है। महाकाल स्वामी कैलाशपुरी जी  ने इस प्रकरण पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह केवल किसी संस्था या व्यक्ति का मामला नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच होनी चाहिए तथा जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाए, उसके विरुद्ध बिना किसी भेदभाव के कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।महाकाल स्वामी कैलाशपुरी ने कहा कि भगवान श्री राम मर्यादा, सत्य, धर्म और न्याय के प्रतीक हैं। उनके धाम से जुड़ी किसी भी प्रकार की अनियमितता या कथित चोरी को साधारण घटना मानकर नहीं देखा जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि किसी ने भी राम भक्तों की आस्था के साथ खिलवाड़ किया है तो उसे कानून के साथ-साथ अपने कर्मों का भी उत्तर देना होगा।महाकाल कैलाशपुरी जी ने कहा कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही, मिलीभगत या भ्रष्टाचार सामने आता है तो दोषियों को उनके पद, प्रभाव या पहचान के आधार पर कोई राहत नहीं मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए और न्याय होते हुए दिखाई भी देना चाहिए।उन्होंने यह भी कहा कि इस विषय पर किसी भी प्रकार की राजनीति उचित नहीं है। उनके अनुसार सत्ता पक्ष का दायित्व है कि वह निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करे, जबकि विपक्ष का कर्तव्य है कि वह केवल राजनीतिक लाभ के बजाय सत्य, पारदर्शिता और जनविश्वास की रक्षा के लिए रचनात्मक भूमिका निभाए। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि धार्मिक आस्था से जुड़े विषयों को चुनावी विवाद का माध्यम न बनाया जाए।महाकाल स्वामी कैलाशपुरी जी ने कहा कि उन्होंने स्वयं अयोध्या जाकर भगवान श्रीराम के चरणों में प्रार्थना की है और उनका विश्वास है कि सत्य अंततः सामने अवश्य आता है। उन्होंने कहा कि भगवान के दरबार में देर हो सकती है, लेकिन अन्याय और असत्य स्थायी नहीं होते। मनुष्य अपने कर्मों से ही सम्मान या दंड प्राप्त करता है।उन्होंने कहा कि संसार की कोई भी संपत्ति मनुष्य के साथ नहीं जाती। अंततः प्रत्येक व्यक्ति को अपने कर्मों का फल भोगना पड़ता है। इसलिए जिन लोगों को समाज और धर्म की सेवा का दायित्व मिला है, उन्हें अधिक ईमानदारी, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व के साथ कार्य करना चाहिए।स्वामी जी ने यह भी कहा कि धार्मिक संस्थानों का संचालन अत्यंत संवेदनशील विषय है। उनके अनुसार ऐसे संस्थानों में व्यवस्था, पारदर्शिता, नियमित लेखा-परीक्षण, सुरक्षा व्यवस्था और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।उन्होंने केंद्र और संबंधित प्रशासन से आग्रह किया कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके विरुद्ध त्वरित और कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि इससे न केवल श्रद्धालुओं का विश्वास मजबूत होगा बल्कि यह संदेश भी जाएगा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है।
महाकाल स्वामी कैलाशपुरी जी ने देशवासियों से अपील की कि वे संयम बनाए रखें, सत्य सामने आने की प्रतीक्षा करें और न्यायिक प्रक्रिया पर विश्वास रखें। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का संदेश सत्य, मर्यादा, करुणा और न्याय का है। इसलिए इस पूरे प्रकरण का समाधान भी सत्य, पारदर्शिता और न्याय के आधार पर ही होना चाहिए।उन्होंने कहा कि अब तक मंदिर में आई दान राशि और सोना चांदी और अन्य जेवरात को भी जनता के बीच सार्वजनिक किया जाये ताकि राम भक्तों का विश्वास बना रहे।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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