स्वामी विवेकानंद युवा चेतना के प्रेरणास्रोत,आध्यात्मिक गुरु और भारतीय संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने वाले महान क्रांतिकारी योद्धा संन्यासी थे। अपनी अल्प आयु में ही स्वामी विवेकानंद ने भारत के ज्ञान, संस्कृति और दर्शन को पूरी दुनिया में पहुंचाने का काम किया। अमेरिका में आयोजित सर्वधर्म सम्मेलन में उन्होंने अपने एक ही संबोधन से सनातन धर्म के विश्व बंधु के संदेश से पूरे संसार को परिचित कराया। यह विचार स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि पर मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने मातृभूमि शिक्षा मंदिर द्वारा आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किए। कार्यक्रम का शुभारंभ स्वस्ति वाचन से हुआ। मातृभूमि शिक्षा मंदिर के विद्यार्थियों ने स्वामी विवेकानंद के जीवन से जुड़े अनेक प्रेरक प्रसंग प्रस्तुत किए।
मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा
आधुनिक काल में पश्चिमी विश्व में राष्ट्रवाद की अवधारणा का विकास हुआ लेकिन स्वामी विवेकानंद का राष्ट्रवाद प्रमुख रूप से भारतीय अध्यात्म एवं नैतिकता से संबद्ध है। भारतीय संस्कृति के प्रमुख घटक मानववाद एवं सार्वभौमिकतावाद विवेकानंद के राष्ट्रवाद की आधारशिला माने जा सकते हैं। पश्चिमी राष्ट्रवाद के विपरीत विवेकानंद का राष्ट्रवाद भारतीय धर्म पर आधारित है जो भारतीय लोगों का जीवन रस है। उनके लेखों और उद्धरणों से यह इंगित होता है कि भारत माता एकमात्र देवी हैं जिनकी प्रार्थना देश के सभी लोगों को हृदय से करनी चाहिये।
डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा स्वामी विवेकानंद ऐसे महान व्यक्तित्व थे, जिन्होंने आधुनिकता और आध्यात्मिकता का अद्भुत समन्वय किया।
स्वामी विवेकानंद ने भारत राष्ट्र के आत्मविश्वास को जगाया था।
विश्व को वेदांत, दर्शन और भारतीय ज्ञान परंपरा से पुनः परिचित कराने वाले स्वामी विवेकानंद ने युवाओं में चरित्र निर्माण और राष्ट्रभक्ति की अलख जगाई। उन्होंने देश के कोने कोने में सांस्कृतिक पुनर्जागरण का शंखनाद किया। मौजूदा समय में विश्व संरक्षणवाद एवं कट्टरवाद की ओर बढ़ रहा है जिससे भारत भी अछूता नहीं है, विवेकानंद का राष्ट्रवाद न सिर्फ अंतर्राष्ट्रीयवाद बल्कि मानववाद की भी प्रेरणा देता है। इसके साथ ही विवेकानंद की धर्म की अवधारणा लोगों को जोड़ने के लिये अत्यंत उपयोगी है, क्योंकि यह अवधारणा भारतीय संस्कृति के प्राण तत्त्व सर्वधर्म समभाव पर ज़ोर देती है। कार्यक्रम को मातृभूमि शिक्षा मंदिर प्रभारी भगवद स्वरूप ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को स्वामी विवेकानंद का साहित्य एवं स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। कार्यक्रम में आश्रम के विद्यार्थी, सदस्य, शिक्षक आदि उपस्थित रहे। स्वामी विवेकानंद कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय गीत वन्देमातरम से हुआ।
