कुरुक्षेत्र, 4 जुलाई। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेव के मार्गदर्शन में आयोजित गुरु-दक्षता संकाय अभिविन्यास कार्यक्रम के द्वितीय दिवस पर नव नियुक्त शिक्षकों को अकादमिक नेतृत्व, शोध एवं व्यावसायिक विकास, भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम, सतत विकास तथा पर्यावरण संरक्षण जैसे समकालीन विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तृत जानकारी प्रदान की। कार्यक्रम के सभी सत्र ज्ञानवर्धक, संवादात्मक एवं प्रेरणादायक रहे।
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में चितकारा विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ के प्रो. अमित मित्तल ने ‘अकादमिक नेतृत्व’ विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों की गुणवत्ता प्रभावी नेतृत्व, नवाचार आधारित शिक्षण तथा शिक्षकों की नेतृत्व क्षमता के सतत विकास पर निर्भर करती है। द्वितीय सत्र में प्रो. अमित मित्तल ने ‘शोध एवं व्यावसायिक विकास’ विषय पर प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि उत्कृष्ट शोध कार्य ही किसी विश्वविद्यालय की शैक्षणिक प्रतिष्ठा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाता है।
तृतीय सत्र में वरिष्ठ प्रो. बी. एस. चौधरी ने ‘भारतीय अंतरिक्ष विकास, सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) एवं जल संसाधन’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का उपयोग सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में अत्यंत महत्वपूर्ण है। साथ ही उन्होंने जल संसाधनों के संरक्षण, उनके वैज्ञानिक प्रबंधन तथा भावी पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम के चतुर्थ एवं अंतिम सत्र में वरिष्ठ प्रो. बी. एस. चौधरी ने ‘भूमि संसाधन, राज्यों के समक्ष चुनौतियाँ एवं पर्यावरण चेतना’ विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग, पर्यावरण संरक्षण तथा जन-जागरूकता वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने भूमि क्षरण, जलवायु परिवर्तन तथा पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों और सतत विकास आधारित सोच अपनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के सभी सत्रों में प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों के साथ सक्रिय संवाद किया तथा विभिन्न विषयों पर अपने अनुभव एवं जिज्ञासाएँ साझा कीं। प्रतिभागियों ने कार्यक्रम को अत्यंत उपयोगी, ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि इससे उनके शिक्षण, शोध एवं शैक्षणिक नेतृत्व कौशल को नई दिशा मिलेगी।
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में चितकारा विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ के प्रो. अमित मित्तल ने ‘अकादमिक नेतृत्व’ विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों की गुणवत्ता प्रभावी नेतृत्व, नवाचार आधारित शिक्षण तथा शिक्षकों की नेतृत्व क्षमता के सतत विकास पर निर्भर करती है। द्वितीय सत्र में प्रो. अमित मित्तल ने ‘शोध एवं व्यावसायिक विकास’ विषय पर प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि उत्कृष्ट शोध कार्य ही किसी विश्वविद्यालय की शैक्षणिक प्रतिष्ठा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाता है।
तृतीय सत्र में वरिष्ठ प्रो. बी. एस. चौधरी ने ‘भारतीय अंतरिक्ष विकास, सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) एवं जल संसाधन’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का उपयोग सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में अत्यंत महत्वपूर्ण है। साथ ही उन्होंने जल संसाधनों के संरक्षण, उनके वैज्ञानिक प्रबंधन तथा भावी पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम के चतुर्थ एवं अंतिम सत्र में वरिष्ठ प्रो. बी. एस. चौधरी ने ‘भूमि संसाधन, राज्यों के समक्ष चुनौतियाँ एवं पर्यावरण चेतना’ विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग, पर्यावरण संरक्षण तथा जन-जागरूकता वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने भूमि क्षरण, जलवायु परिवर्तन तथा पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों और सतत विकास आधारित सोच अपनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के सभी सत्रों में प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों के साथ सक्रिय संवाद किया तथा विभिन्न विषयों पर अपने अनुभव एवं जिज्ञासाएँ साझा कीं। प्रतिभागियों ने कार्यक्रम को अत्यंत उपयोगी, ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि इससे उनके शिक्षण, शोध एवं शैक्षणिक नेतृत्व कौशल को नई दिशा मिलेगी।
