कब तक जहरीली सीवर गैस निगलती रहेगी सफाई कर्मचारियों की ज़िंदगी : एडवोकेट वासु रंजन
सीवरेज सफाई केवल आधुनिक मशीनों, रोबोटिक तकनीक से हो व सफाई कर्मचारी को गैस डिटेक्टर, ऑक्सीजन उपकरण, सेफ्टी हार्नेस, हेलमेट, दस्ताने, गमबूट एवं अन्य अनिवार्य सुरक्षा उपकरण मुहैया करवाए जायें
अंबाला : काउंसिल ऑफ लॉयर्स के चेयरमैन एवं सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट वासु रंजन ने देशभर में सीवर एवं सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान लगातार हो रही सफाई कर्मचारियों की दर्दनाक मौतों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह को एक विस्तृत ज्ञापन भेजा है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों को तत्काल आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
एडवोकेट वासु रंजन ने कहा कि आज जब भारत विश्वस्तरीय आधारभूत ढांचे, बुलेट ट्रेन, डिजिटल इंडिया और आधुनिक तकनीक के युग में प्रवेश कर चुका है, तब भी सफाई कर्मचारियों को जहरीली गैस से भरे सीवरों में उतरकर अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ रही है। यह केवल एक प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और संवैधानिक अधिकारों का भी गंभीर प्रश्न है।
उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद-21 के अंतर्गत प्रत्येक नागरिक को गरिमापूर्ण एवं सुरक्षित जीवन का अधिकार प्राप्त है। सफाई कर्मचारी भी उतने ही सम्मान और सुरक्षा के अधिकारी हैं जितना कोई अन्य नागरिक। सीवर में जहरीली गैस के कारण होने वाली प्रत्येक मृत्यु रोकी जा सकती है, यदि सरकार आधुनिक तकनीक और सुरक्षा मानकों को प्रभावी ढंग से लागू करे।
अपने ज्ञापन में एडवोकेट वासु रंजन ने हाल के वर्षों में दिल्ली, राजस्थान, महाराष्ट्र सहित देश के विभिन्न राज्यों में सीवर एवं सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस से हुई सफाई कर्मचारियों की मौतों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएँ यह साबित करती हैं कि केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता है।
उन्होंने केंद्र सरकार से “राष्ट्रीय सीवरेज सुरक्षा नीति लागू करने की मांग करते हुए कहा कि पूरे देश में सीवरेज एवं सेप्टिक टैंक की सफाई केवल आधुनिक मशीनों, रोबोटिक तकनीक और मैकेनाइज्ड सिस्टम से कराई जाए। प्रत्येक सफाई कर्मचारी को गैस डिटेक्टर, ऑक्सीजन उपकरण, सेफ्टी हार्नेस, हेलमेट, दस्ताने, गमबूट एवं अन्य अनिवार्य सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए। किसी भी कर्मचारी को बिना सुरक्षा उपकरणों के सीवर में उतारने वाले अधिकारियों एवं ठेकेदारों के विरुद्ध सख्त आपराधिक कार्रवाई की जाए तथा मृतक कर्मचारियों के परिवारों को तत्काल मुआवजा एवं पुनर्वास प्रदान किया जाए।
एडवोकेट वासु रंजन ने कहा कि प्रत्येक नगर निगम, नगर परिषद एवं ग्राम पंचायत में आधुनिक रोबोटिक सीवर क्लीनिंग मशीनें, सक्शन-कम-जेटिंग मशीनें, हाई-प्रेशर जेटिंग सिस्टम तथा गैस डिटेक्शन उपकरण उपलब्ध कराए जाएँ। सीवर में किसी भी व्यक्ति के प्रवेश से पूर्व जहरीली गैस की अनिवार्य जांच की जाए तथा आपातकालीन बचाव दल एवं चिकित्सा सहायता हर समय उपलब्ध रहे।
उन्होंने कहा कि सीवरेज की सफाई मशीनों से होनी चाहिए, क्योंकि हर सफाई कर्मचारी की जान की कीमत होती है। जो लोग हमारे शहरों और देश को स्वच्छ रखते हैं, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है। किसी भी परिवार का सहारा केवल इसलिए नहीं छिनना चाहिए कि उसे बिना सुरक्षा उपकरणों के जहरीले सीवर में उतरना पड़ा।
एडवोकेट वासु रंजन ने केंद्र सरकार से मांग की कि सभी राज्यों को एक समान सुरक्षा मानक लागू करने के निर्देश दिए जाएँ, जिला स्तर पर सीवरेज सुरक्षा निगरानी समितियाँ गठित की जाएँ, सफाई कर्मचारियों को नियमित प्रशिक्षण दिया जाए तथा पूरे देश में सीवर सफाई कार्य की डिजिटल मॉनिटरिंग की व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि काउंसिल ऑफ लॉयर्स देशभर के सफाई कर्मचारियों के जीवन, सुरक्षा और सम्मान के लिए इस अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाएगी। यदि इस गंभीर विषय पर समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो सफाई कर्मचारियों के मौलिक अधिकारों की रक्षा हेतु न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा।
