कुरुक्षेत्र, 24 जून। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) कुरुक्षेत्र की डॉ. तन्वी गुप्ता द्वारा विकसित पर्यावरण-अनुकूल उच्च-प्रदर्शन कंक्रीट की टेक्नोलॉजी को भारतीय पेटेंट मिला है।
प्रो. सोमनाथ सचदेवा और डॉ. तन्वी गुप्ता द्वारा विकसित इस टेक्नोलॉजी में औद्योगिक अपशिष्टों का उपयोग करके पर्यावरण अनुकूल उच्च प्रदर्शन वाला कंक्रीट तैयार किया गया है। इसमें स्टेनलेस स्टील उद्योग से प्राप्त एओडी स्टील स्लैग और जिंक निष्कर्षण का उप-उत्पाद जारोसाइट को सीमेंट के आंशिक प्रतिस्थापन के रूप में शामिल किया गया है। भारत में प्रतिवर्ष लगभग 19 मिलियन टन स्टील स्लैग और 0.5 मिलियन टन जारोसाइट उत्पन्न होता है, जो वर्तमान में लैंडफिल में डंप किया जाता है और पर्यावरणीय समस्याएं पैदा करता है। इस नवाचार से इन अपशिष्टों को मूल्यवान निर्माण सामग्री में बदला जा सकेगा।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने बताया कि यह पेटेंट सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान कुरुक्षेत्र की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह तकनीक औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन, संसाधन संरक्षण, लागत बचत और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में महत्वपूर्ण योगदान तथा सर्कुलर अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगी।
डॉ तन्वी गुप्ता ने बताया कि विकसित टर्नरी ब्लंडेड कंक्रीट में लगभग 30 प्रतिशत औद्योगिक अपशिष्ट सामग्री (जिसमें एओडी स्टील स्लैग और जारोसाइट शामिल है) का उपयोग किया गया है। प्रयोगों में इस कंक्रीट ने 50 एमपीए से ज्यादा की कम्प्रेसिव स्ट्रेंथ हासिल की, जो पारपंरिक कंक्रीट से अधिक है। साथ ही इसमें सड़क निर्माण के लिए आवश्यक फ्लेक्सुरल स्ट्रेंथ ज्यादा पाई गई है तथा घर्षण और एसिड अटैक के प्रति भी बेहतर प्रतिरोध पाया गया है। यह कंक्रीट कम लागत, कम कार्बन उत्सर्जन और उच्च टिकाऊपन के साथ राजमार्गों, पुलों, औद्योगिक फर्शों, प्री-कास्ट उत्पादों, आवासीय एवं वाणिज्यिक भवनों आदि के निर्माण के लिए अत्यंत उपयुक्त है।
