फरीदाबाद। सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले में फरवरी माह में हुए चर्चित ‘सुनामी झूला’ हादसे में फरीदाबाद पुलिस ने एक और आरोपित को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बलजीत शर्मा को गिरफ्तार कर मामले की जांच आगे बढ़ा दी है। पुलिस के अनुसार हादसे से पहले झूलों की सुरक्षा जांच से संबंधित दस्तावेजों में उसकी भूमिका सामने आई है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि सूरजकुंड मेले में झूलों का संचालन करने का टेंडर एम/एस द हिमाचल फन फेयर के नाम पर लिया गया था, जिसके संचालक मो. शाकिर थे। आरोप है कि मो. शाकिर की गैरमौजूदगी में 4 फरवरी से 7 फरवरी 2026 तक झूलों की दैनिक निरीक्षण रिपोर्ट पर बलजीत शर्मा ने हस्ताक्षर किए, जबकि वह संबंधित फर्म का मालिक नहीं था। पुलिस का आरोप है कि यह कार्य कथित रूप से आपसी मिलीभगत और षड्यंत्र के तहत किया गया।
पुलिस के अनुसार मेले में प्रतिदिन निरीक्षण समिति झूलों की जांच कर रिपोर्ट तैयार करती थी, जिस पर समिति के अधिकारियों के साथ टेंडर धारक के हस्ताक्षर भी आवश्यक थे। जांच में पाया गया कि संबंधित अवधि के दौरान रिपोर्ट पर बलजीत शर्मा के हस्ताक्षर किए गए। इसी आधार पर उसे गिरफ्तार किया गया।
क्या है पूरा मामला?
गौरतलब है कि सात फरवरी 2026 को सूरजकुंड मेले में लगा ‘सुनामी झूला’ संचालन के दौरान अचानक टूटकर गिर गया था।हादसे में ड्यूटी पर तैनात पुलिस इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद की जान चली गई थी, जबकि 13 अन्य लोग घायल हुए थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद झूले में फंसे लोगों को बचाने का प्रयास कर रहे थे, इसी दौरान झूले का हिस्सा उन पर आ गिरा था।
हादसे के बाद प्रशासन ने जांच के आदेश दिए थे। बाद में विभिन्न जांचों में झूले की सुरक्षा व्यवस्था और अनुमति प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठे। एक रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि हादसे का शिकार बना ‘सुनामी झूला’ मूल स्वीकृत सूची में शामिल नहीं था और उसके संचालन को लेकर नियमों के पालन पर सवाल खड़े हुए थे।
इस मामले में इससे पहले झूला संचालक मो. शाकिर और उपकरण उपलब्ध कराने वाले अन्य आरोपितों की भी गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस का कहना है कि मामले में सभी पहलुओं की जांच जारी है और जो भी व्यक्ति लापरवाही या नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
