कुरुक्षेत्र, 11 जून। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने कहा कि गीता व्यक्ति को कर्तव्य, अनुशासन, आत्मविश्वास, नेतृत्व और जीवन प्रबंधन की शिक्षा देती है। यदि युवा पीढ़ी गीता के सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाए, तो वह न केवल व्यक्तिगत सफलता प्राप्त कर सकती है, बल्कि समाज और राष्ट्र के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। गीता हमें निष्काम कर्म, समभाव और मानव सेवा का संदेश देती है, जो एक सशक्त और संस्कारित समाज की आधारशिला हैं। इसी कड़ी में गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज की उपस्थिति में गीता ज्ञान संस्थानम में गीता ज्ञान संस्थान जीओ गीता और इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय मीरपुर के बीच गीता के प्रचार-प्रसार को लेकर एमओयू हुआ। इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय की ओर से कुलपति प्रोफेसर असीम मिगलानी और जीओ गीता की ओर से सचिव मदन मोहन छाबड़ा ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए।
एमओयू का उद्देश्य गीता आधारित शिक्षा, शोध और अकादमिक गतिविधियों को नई गति देना है। इसके साथ ही भगवद्गीता के शाश्वत ज्ञान को अकादमिक जगत से जोड़ते हुए विद्यार्थियों, शोधार्थियों और समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचाना है। इसके तहत दोनों संस्थाएं गीता के अध्ययन, शोध, प्रशिक्षण और प्रसार के लिए संयुक्त रूप से कार्य करेंगी तथा शैक्षणिक और संस्थागत सहयोग को मजबूत बनाएंगी।
स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और जीवन मूल्यों का विकास भी होना चाहिए। गीता के अध्ययन को विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों से जोड़ना एक सराहनीय और दूरदर्शी पहल है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि गीता ज्ञान संस्थानम् और इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय के बीच हुआ समझौता युवाओं में नैतिकता, आध्यात्मिकता और राष्ट्रसेवा की भावना को मजबूती देगा। दोनों संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने विश्वास व्यक्त किया कि यह समझौता केवल एक औपचारिक साझेदारी नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा के समन्वय की दिशा में सराहनीय पहल है। उन्होंने कहा कि इस सहयोग से विद्यार्थियों और शोधार्थियों को नए अवसर प्राप्त होंगे तथा भगवद्गीता के ज्ञान, दर्शन और जीवन मूल्यों के व्यापक प्रसार को नई ऊर्जा मिलेगी। इस दौरान आईजीयू के कुलसचिव प्रोफेसर दिलबाग सिंह, डीन एकेडिमक अफेयर प्रोफेसर सुनील कुमार, गीता अध्ययन एवं शोध केंद्र गीता ज्ञान संस्थानम के निदेशक प्रोफेसर विवेक कोहली तथा गीता अध्ययन एवं शोध केंद्र के संयोजक डॉ. तरुण शास्त्री प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

गीता संबंधी पाठ्यक्रमों का संचालन करेगा विश्वविद्यालय : मिगलानी
इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर असीम मिगलानी ने बताया कि एमओयू के अनुसार इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय गीता संबंधी कार्यक्रमों और पाठ्यक्रमों के संचालन के लिए आवश्यक शैक्षणिक एवं आधारभूत संरचना उपलब्ध कराएगा। विश्वविद्यालय छात्रों को गीता अध्ययन और उससे जुड़ी गतिविधियों में भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करेगा। इसके अलावा विश्वविद्यालय द्वारा संचालित पाठ्यक्रमों की सैद्धांतिक और प्रायोगिक परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। समझौते में शैक्षणिक गुणवत्ता और सहभागिता सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया गया है।

गीता के मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए आयोजित होंगी गतिविधियां : छाबड़ा
जीओ गीता सचिव मदन मोहन छाबड़ा ने बताया कि एमओयू के तहत दोनों संस्थाएं मिलकर भगवद्गीता पर आधारित अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक शैक्षणिक पाठ्यक्रम संचालित करेंगी। साथ ही, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सेमिनार, कार्यशालाएं और शोध संगोष्ठियां आयोजित की जाएंगी। गीता के दार्शनिक, नैतिक और सामाजिक मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए विभिन्न विस्तार गतिविधियां भी चलाई जाएंगी। इसके तहत, भगवद्गीता से संबंधित सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी कार्यक्रमों के पाठ्यक्रमों में किसी प्रकार के संशोधन अथवा अन्य शैक्षणिक निर्णय लिए जाने की स्थिति में विश्वविद्यालय के बोर्ड ऑफ स्टडीज़ में गीता ज्ञान संस्थानम् के कम से कम एक प्रतिनिधि को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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