चंडीगढ़। हरियाणा की तहसीलों में वर्षों से चली आ रही दलाली, भ्रष्टाचार और मनमानी पर अब बड़ा प्रहार होने जा रहा है। यदि राज्य सरकार की नई योजना लागू होती है तो जमीन, मकान और दुकानों की रजिस्ट्रियां कराने के लिए लोगों को न तो घंटों कतारों में खड़ा रहना पड़ेगा और न ही किसी दलाल के माध्यम से तहसील कार्यालयों के चक्कर लगाने होंगे।

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री विपुल गोयल ने तहसीलों की कार्यप्रणाली में आमूलचूल बदलाव का प्रस्ताव तैयार कर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के समक्ष भेजा है। प्रस्ताव के अनुसार तहसीलों में रजिस्ट्री प्रक्रिया को पासपोर्ट सेवा केंद्र और वीजा कार्यालयों की तर्ज पर संचालित किया जाएगा।

तहसीलों में बनने वाले विशेष काउंटरों पर आवेदकों को रजिस्ट्रियां कराने के लिए निर्धारित समय का टोकन मिलेगा, अलग-अलग काउंटरों पर उसकी प्रक्रिया पूरी होगी और पूरी व्यवस्था डिजिटल व पारदर्शी होगी।

इससे मानव हस्तक्षेप कम होगा और भ्रष्टाचार की संभावनाएं भी काफी हद तक समाप्त हो जाएंगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी इस प्रस्ताव का अवलोकन कर रहे हैं। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो बदनाम तहसीलें लोगों की सुविधा का प्रमुख केंद्र बन जाएंगी।

जांच और कार्रवाई का सामना भी कर चुके कई तहसीलदार

दरअसल, हरियाणा की अधिकतर तहसीलें लंबे समय से दलालों के प्रभाव, फाइलों की अनावश्यक देरी और कथित रिश्वतखोरी के आरोपों से घिरी रही हैं। आम लोगों की शिकायत रहती है कि बिना बिचौलियों की मदद के रजिस्ट्री करवाना कठिन होता है। कई मामलों में रजिस्ट्री क्लर्कों और राजस्व अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं, जबकि कुछ तहसीलदार फर्जी रजिस्ट्रियों के मामलों में जांच और कार्रवाई का सामना भी कर चुके हैं।

कोरोना काल के दौरान जमीनों की खरीद-फरोख्त और रजिस्ट्रियों में अनियमितताओं के कई मामले सामने आए थे। इसके बाद सरकार को विभिन्न स्तरों पर जांच करानी पड़ी और कई राजस्व अधिकारियों, नायब तहसीलदारों, तहसीलदारों तथा रजिस्ट्री क्लर्कों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिशें भी की गईं। इसके बावजूद तहसीलों की कार्यप्रणाली को लेकर लोगों की नाराजगी बनी रही।

पूरे प्रदेश में किया जाएगा लागू

नई व्यवस्था लागू होने पर प्रत्येक चरण की निगरानी संभव होगी। आवेदक को यह पता रहेगा कि उसकी फाइल किस स्तर पर है और उसे कब तक सेवा मिलेगी। इससे न केवल भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा बल्कि लोगों का समय और पैसा भी बचेगा। सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि रजिस्ट्री प्रक्रिया व्यक्ति आधारित न होकर सिस्टम आधारित बनेगी।

सूत्रों के अनुसार इस माडल की शुरुआत प्रयोग के तौर पर गुरुग्राम या फरीदाबाद जिले की किसी तहसील से की जा सकती है। वहां सफलता मिलने के बाद इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।

यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो हरियाणा देश का पहला ऐसा राज्य बन सकता है जहां तहसीलों में रजिस्ट्री व्यवस्था को पूरी तरह सेवा-केंद्र आधारित और पारदर्शी बनाया जाएगा। यह कदम केवल तहसीलों में सुधार नहीं होगा, बल्कि सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में एक नई क्रांति साबित हो सकता है।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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