कुरुक्षेत्र, 10 जून 2026 – आर्य समाज की युवा शाखा सार्वदेशिक आर्यवीर दल के तत्वावधान में गुरुकुल कुरुक्षेत्र परिसर में आयोजित राष्ट्रीय जीवन निर्माण एवं आत्मरक्षा शिविर में देश भर से आए युवाओं ने अदम्य उत्साह का प्रदर्शन किया। शिविर के विशेष सत्र में युवाओं को पारंपरिक आत्मरक्षा के गुर सिखाते हुए लाठी चलाने (यष्टि संचालन) का सघन प्रशिक्षण दिया गया। सार्वदेशिक आर्यवीर दल के प्रधान संचालक आचार्य नन्दकिशोर के नेतृत्व में अनुभवी प्रशिक्षकों ने युवाओं को लाठी का प्रशिक्षण दिया।
इस शिविर का मुख्य उद्देश्य आधुनिकता की दौड़ में खो रहे युवाओं को अपनी संस्कृति से जोड़ना और उनमें राष्ट्र रक्षा का भाव जगाना है।
शौर्य और अनुशासन का प्रदर्शन
शिविर के मुख्य मैदान पर सुबह की पहली किरण के साथ ही भगवा ध्वज के साए में युवाओं का जोश देखने लायक था। ‘वंदे मातरम्’ और ‘ओ३म्’ के जयघोष के बीच अनुभवी प्रशिक्षकों  देखरेख में युवाओं ने लाठी घुमाने की विभिन्न विधाओं का अभ्यास किया
प्रशिक्षण के दौरान युवाओं को सिखाया गया कि लाठी केवल एक लकड़ी का टुकड़ा नहीं, बल्कि आत्मरक्षा का एक अचूक और सुलभ साधन है। युवाओं ने लाठी के वार, बचाव, पैंतरेबाजी और व्यूह रचना का शानदार प्रदर्शन किया।
इसके अलावा आर्यवीरों व आर्य वीरांगनाओं के शारीरिक सुदृढ़ता हेतु सूर्य नमस्कार, योगासन का अभ्यास कराया गया। वहीं बौद्धिक सत्र में राष्ट्रवाद, वैदिक संस्कृति, महापुरुषों के जीवन चरित्र और व्यसनमुक्ति पर प्रबुद्ध संन्यासियों और विद्वानों के व्याख्यान प्रतिदिन किये जा रहे हैं।
लाठी आत्मरक्षा और स्वाभिमान का प्रतीक है
सार्वदेशिक आर्यवीर दल न्यास के अध्यक्ष स्वामी देवव्रत सरस्वती ने शिविर में आए युवाओं को संबोधित करते हुए कहा -आर्यवीर दल का उद्देश्य समाज में भय का माहौल बनाना नहीं, बल्कि भयमुक्त समाज का निर्माण करना है। लाठी चलाना सिखाने का अर्थ किसी पर अत्याचार करना नहीं, बल्कि अत्याचार के सामने ढाल बनकर खड़े होना है। एक आर्यवीर के हाथ में लाठी समाज की कमजोरियों की रक्षा के लिए होती है।
उन्होंने आगे कहा कि आज के डिजिटल युग में जहां युवा मोबाइल स्क्रीनों तक सीमित हो रहे हैं, ऐसे शिविर उन्हें शारीरिक रूप से वज्र के समान मजबूत और मानसिक रूप से शांत बनाने का कार्य करते हैं।
देशभर से जुटे हजारों आर्यवीर
इस राष्ट्रीय शिविर में उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, उड़ीसा, तमिनाडु, आंधप्रदेश आदि 15 प्रदेशों से 1000 हजार से अधिक, आर्यवीरों एवं आर्य वीरांगनाओं ने हिस्सा लिया। शिविर से लौटकर ये युवा अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर स्थानीय स्तर पर शाखाएं शुरू करेंगे और अन्य युवाओं को भी इस मुहिम से जोड़ेंगे।
इस शिविर ने यह साबित कर दिया कि यदि युवाओं को सही दिशा, संस्कार और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा दी जाए, तो वे देश के सजग प्रहरी बन सकते हैं।

By Dr. Rajesh Wadhwa

778-779, Partap Colony, Railway Road, Near Rudra Cinema, Opp Chaat King India Row, Kurukshetra 136118 Mob. 9896352867, 9467040367

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *