कुरुक्षेत्र 28 मई। हरियाणा कला परिषद द्वारा विभिन्न अवसरों पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से प्रदेश की कला और संस्कृति को बढ़ावा देते हुए न केवल कलाकारों को मंच दिया जा रहा है, बल्कि युवा पीढ़ी को कला के प्रति जागरुक किया जा रहा है। इसी उद्देश्य को पूरा करते हरियाणा कला परिषद द्वारा धर्मनगरी में हरियाणवी संस्कृति से ओतप्रोत कार्यक्रम करवाया गया। ब्रह्मसरोवर के निकट दक्ष प्रजापति धर्मशाला कुरुक्षेत्र में आयोजित शुक्ल एकादशी कार्यक्रम के दौरान हरियाणा कला परिषद के कलाकारों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से स्थानीय लोगों के साथ-साथ राजस्थान से ब्रह्मसरोवर स्नान के लिए आए श्रद्धालुओं का भी मन मोहा। अंकित हरियाणवी व उनकी टीम में शामिल समस्त कलाकारों ने हरियाणवी नृत्य तथा भक्ति से भरपूर हरियाणवी लोकगीतों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। तू राजा की राज दुलारी मैं सिर्फ लंगोटे आला सूं, भांग रगड़ के पिया करुं मैं कुण्डी सोटे आला सूं के माध्यम से कलाकारों ने शिवभक्ति का सुंदर परिचय दिया। एक ओर जहां हरियाणवी रीति-रिवाजों पर आधारित प्रस्तुतियां देकर कलाकारों ने लोगों को आंनदित किया, वहीं रागनियों व भक्ति गीतों के माध्यम से कलाकारों ने हरियाणवी परिवेश के दर्शन कराए। राम और लछमन दशरथ के बेटे दोनों बन को जाए, ऐरी कोई राम मिले भगवान, ए री मेरे कोठी पड़री चार मैं क्यूं राम रटन लागी, तेरी अजब निराली शान मेरे वाल्मिकी भगवान जैसे भक्ति गीतों के माध्यम से कलाकारों ने भक्ति धारा का प्रवाह किया। इस अवसर पर दक्ष प्रजापति धर्मशाला के प्रतिनिधि दर्शन लाल ने कलाकारों की सराहना करते हुए कहा कि हरियाणा कला परिषद का मुख्य उद्देश्य प्रदेश की संस्कृति को विस्तार देकर जन जन तक पहुंचाना है, जिसके लिए कला परिषद द्वारा अथक प्रयास किये जा रहे हैं। इन्हीं प्रयासों के दौरान युवा वर्ग को संस्कृति से जोड़ने तथा हरियाणवी कला से रुबरु करवाने के लिए कार्यक्रम का आयोजन सफल रहा। इस मौके पर हरियाणा कला परिषद के कार्यालय प्रभारी धर्मपाल गुगलानी, विकास शर्मा सहित संस्था के पदाधिकारी तथा अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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