करनाल, 27 मई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और वोकल फॉर लोकल व आत्मनिर्भर भारत अभियानों से प्रेरित होकर खादी और ग्रामोद्योग आयोग ने वित्त वर्ष 2025-26 में प्रदर्शन के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। केवीआईसी के अध्यक्ष मनोज कुमार ने राजघाट स्थित गांधी दर्शन कार्यालय में वित्त वर्ष 2025-26 के अनंतिम आंकड़े जारी किए।
जारी आंकड़ों के अनुसार खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र का कुल कारोबार पहली बार 1,87,105 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है। वर्ष 2013-14 की तुलना में बिक्री में 501 प्रतिशत और उत्पादन (1,25,296 करोड़ रुपये) में 380 प्रतिशत की अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले 12 वर्षों में इस क्षेत्र में संयी रोजगार में 56 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिससे अब 2.04 करोड़ लोगों को रोजगार उपलब्ध हो रहा है।
खादी वस्त्र और ग्रामोद्योग का विस्तार हुआ है। इसमें बिक्री 2013-14 के 1,081 करोड़ रुपये से 628 प्रतिशत बढक़र 7,869 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। ग्रामोद्योग उत्पाद की बिक्री 30,073 करोड़ रुपये से बढक़र 1,79,236 करोड़ रुपये हो गई।
उन्होंने बताया कि खादी क्षेत्र के करीब 5 लाख कारीगरों में 80 प्रतिशत से अधिक भागीदारी महिलाओं की है। केवीआईसी प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भी 59 प्रतिशत महिलाएं (47,382) शामिल रहीं। इसके अलावा, पीएमईजीपी के तहत 28,180 महिला उद्यमियों ने नई इकाइयां स्थापित कीं। कारीगरों का पारिश्रमिक 4 रुपये प्रति हैंक (2013-14) से 275 प्रतिशत बढक़र 15 रुपये प्रति हैंक हो गया है।
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के तहत वित्त वर्ष 2025-26 में 66,494 नई इकाइयां स्थापित की गईं, जिससे 7.31 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिला। वहीं, ग्रामोद्योग विकास योजना के तहत इस वर्ष 37,769 टूलकिट व मशीनें वितरित की गईं। हर घर तिरंगा अभियान के प्रभाव से राष्ट्रीय ध्वज की बिक्री 0.87 करोड़ रुपये (2013-14) से बढक़र 2.35 करोड़ रुपये पहुंच गई है।
केवीआईसी अध्यक्ष मनोज कुमार ने कहा कि खादी आज केवल पारंपरिक उत्पाद नहीं, बल्कि ग्रामीण समृद्धि और नये भारत की आत्मनिर्भरता का जीवंत प्रतीक बन चुकी है, जो विकसित भारत-2047 के संकल्प को गति दे रही है।

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