चंडीगढ़ – आज से ठीक 36 वर्ष पूर्व 27 मई 1990 को तत्कालीन सातवीं हरियाणा विधानसभा की दो रिक्त सीटों के लिए हुए उपचुनाव के नतीजे घोषित किये गए थे जिसमें अम्बाला जिले के अम्बाला कैंट विधानसभा हलके से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के टिकट पर अनिल विज पहली बार चुनाव जीतकर विधायक के तौर पर निर्वाचित हुए थे. वहीं उसी दिन सिरसा जिले की तत्कालीन दरबा कलां सीट से जनता दल के टिकट पर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत ओम प्रकाश चौटाला विजयी होकर हालांकि दूसरी बार विधायक बने थे.
अम्बाला शहर के सेक्टर 7 निवासी हाईकोर्ट एडवोकेट और राजनीतिक एवं प्रशासनिक विश्लेषक हेमंत कुमार ने आज इस सम्बन्ध में आधिकारिक आंकड़ों का अध्ययन करने के बाद बताया कि अम्बाला कैंट में मई, 1990 में हुए उपरोक्त उपचुनाव में अम्बाला ज़िले के तत्कालीन डीसी (उपायुक्त ) एस.पी. लाम्बा, आई.ए.एस. को रिटर्निंग अफसर (निर्वाचन अधिकारी) बनाया गया था जिन्होंने उपचुनाव में विधायक के तौर पर निर्वाचित अनिल विज को इलेक्शन सर्टिफिकेट (निर्वाचन प्रमाण पत्र) प्रदान किया था. वह चुनाव हालांकि विज ने अनिल कुमार के नाम से लड़ा था.
हेमंत ने आगे बताया कि हालांकि जून, 1987 में सातवीं हरियाणा विधानसभा आम चुनावों में अम्बाला कैंट विधानसभा सीट से भाजपा की वरिष्ठ नेत्री एवं दिवंगत सुषमा स्वराज विजयी होकर दूसरी बार अम्बाला कैंट से विधायक बनी थी जिसके बाद वह प्रदेश में तत्कालीन देवी लाल के नेतृत्व वाली लोक दल- भाजपा गठबंधन सरकार में कैबिनेट मंत्री भी बनी परन्तु चूँकि अप्रैल, 1990 में सुषमा हरियाणा से राज्य सभा के लिए निर्वाचित हो गयी थीं, इसलिए उन्होंने अम्बाला कैंट सीट के विधायक पद से त्यागपत्र दे दिया था जिसके कारण इस सीट पर उपचुनाव करवाना पड़ा था.
उस उपचुनाव में भाजपा के टिकट पर अनिल विज ने चुनाव लड़ा और विजयी हुए जिसमें उन्होंने कांग्रेस के राम दास धमीजा एवं निर्दलयी अर्जुन लाल कालड़ा ( जिन्हें अंदरखाते तत्कालीन मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला का भी समर्थन हासिल था) को पराजित किया था. उस समय विज की आयु मात्र 37 वर्ष दो महीने थी एवं उन्होंने स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया में क्लेरिकल पद की नौकरी छोड़कर वह उपचुनाव लड़ा था.
हेमंत ने बताया कि उस उपचुनाव में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल, जो हालांकि तब सीधे तौर पर भाजपा में नहीं थे बल्कि वह तब आर.एस.एस. प्रचारक थे एवं अम्बाला कैंट क्षेत्र उन्ही के अधीन था, उन्होंने भी अनिल विज के चुनाव प्रचार हेतु अम्बाला कैंट में करीब डेढ़ महीना प्रवास किया था. वह चुनाव अनिल विज ने बेहद कठिन परिस्थितियों में जीता था क्योंकि तत्कालीन मुख्यमंत्री ओ.पी. चौटाला राजनैतिक कारणों से भाजपा को नहीं जिताना चाहते थे.
बहरहाल, मई, 1990 उपचुनाव होने के बाद एक वर्ष से भी पूर्व अप्रैल,1991 में सातवीं हरियाणा विधानसभा समयपूर्व ही भंग कर दी गयी थी क्योंकि तत्कालीन मुख्यमंत्री ओ.पी. चौटाला तत्कालीन राज्यपाल धनिक लाल मंडल के निर्देशानुसार सदन में उनकी सरकार का बहुमत साबित नहीं कर पाए थे एवं राज्यपाल की सिफारिश पर तत्कालीन केंद्र सरकार ने हरियाणा सरकार को अल्पमत में होने कारण बर्खास्त कर दिया था जिसके बाद आगामी कुछ माह तक प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था. जून, 1991 में कराये गये आठवीं हरियाणा विधानसभा के आम चुनावों में कांग्रेस के बृज आनंद ने हालांकि भाजपा से दूसरी बार चुनाव लड़ रहे अनिल विज को पराजित कर दिया था.
इसके कुछ वर्ष बाद 1995 में पार्टी से कुछ मतभेद होने के फलस्वरूप विज को भाजपा छोड़नी पड़ी एवं वर्ष 1996 और 2000 लगातार दो हरियाणा विधानसभा आम चुनावों में विज निर्दलयी के तौर पर लड़ते हुए लगातार दो बार कैंट से विधायक बने. हालांकि वर्ष 2005 विधानसभा आम चुनाव में कांग्रेसी प्रत्याशी एडवोकेट देवेंद्र बंसल ने विज को मात्र 615 वोटो से पराजित कर दिया.
इसके बाद वर्ष 2007 में अनिल विज ने विकास परिषद के नाम से अपनी अलग राजनीतिक पार्टी भारतीय चुनाव आयोग से पंजीकृत करवाई हालांकि 2009 हरियाणा विधानसभा आम चुनावों से ठीक पहले वह फिर भाजपा में शामिल हो गए एवं 2009, 2014, 2019 और 2024 में लगातार चार विधानसभा चुनावों में लगातार चार बार अम्बाला कैंट से विधायक निर्वाचित हुए.
