करनाल, 27 मई-   सामाजिक अंकेक्षण केवल योजनाओं की जांच का माध्यम नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास योजनाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और जन भागीदारी सुनिश्चित करने का सशक्त उपकरण है। यह बात हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान के निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कही। वे संस्थान में चल रहे तीस दिवसीय सामाजिक अंकेक्षण विषय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन सत्र में प्रतिभागियों को संबोधित कर रहे थे।

डॉ. चौहान ने कहा कि प्रत्येक मजदूर का जॉब कार्ड बनना सुनिश्चित होना चाहिए और श्रमिकों को उनकी क्षमता एवं कार्यकुशलता के अनुरूप ही कार्य दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब मजदूर को उसकी योग्यता के अनुसार कार्य मिलता है, तब वह अधिक मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के साथ कार्य करता है, जिससे योजनाओं की गुणवत्ता भी बेहतर होती है और श्रमिकों का जीवन स्तर भी ऊंचा उठता है। उन्होंने अधिकारियों एवं संसाधन व्यक्तियों से आह्वान किया कि वे अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए संवेदनशीलता और ईमानदारी के साथ कार्य करें।

डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि सामाजिक अंकेक्षण लोकतंत्र की उस भावना को मजबूत करता है, जिसमें जनता स्वयं विकास कार्यों की निगरानी करती है। उन्होंने कहा कि जब समाज जागरूक होकर योजनाओं की समीक्षा करता है तो भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर अंकुश लगता है तथा पात्र व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचता है। उन्होंने प्रतिभागियों का आह्वान किया कि वे प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान और अनुभव को जमीनी स्तर पर लागू करते हुए ग्रामीण विकास की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी एवं उत्तरदायी बनाएं।उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित संसाधन व्यक्ति गांव स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी और जनहितकारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

कार्यक्रम में झारखंड से आए लीड कोर्स कॉर्डिनेटर विश्वनाथ सिंह  ने कहा कि तीस दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को सामाजिक अंकेक्षण की प्रक्रिया, ग्राम स्तरीय योजनाओं की समीक्षा, अभिलेख परीक्षण, जनसुनवाई एवं सामुदायिक सहभागिता से जुड़े विभिन्न विषयों पर व्यावहारिक एवं सैद्धांतिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण का उद्देश्य ऐसे दक्ष संसाधन व्यक्तियों को तैयार करना है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में पारदर्शिता और सुशासन को बढ़ावा दे सकें।

इस अवसर पर राष्ट्रीय ग्रामीण विकास संस्थान से पधारे राजेश सिन्हा ने कहा कि सामाजिक अंकेक्षण ग्रामीण विकास योजनाओं में जनता के विश्वास को मजबूत करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को व्यवहारिक अनुभव प्रदान किया गया, जिससे वे गांव स्तर पर योजनाओं के प्रभावी मूल्यांकन और जनसुनवाई प्रक्रिया का सफल संचालन कर सकें।

संस्थान के सहायक आचार्य एवं कॉर्डिनेटर वजीर सिंह ने कार्यक्रम का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर सहायक आचार्य सुशील मेहता, संदीप कुमार, कमलदीप सांगवान, स्टेट पंचायत रिसोर्स सेंटर से सलाहकार नीलम छिकारा ओर संस्थान से सौरभ अरोड़ा, अजय कुमार, मोहित शर्मा, सुनील कुमार, रजनीश कुमार, महिंद्र सिंह, संजीव कुमार, प्रवीण कुमार, शैलेंद्र कुमार, ईश्वर सिंह एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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