करनाल, 25 मई। हरियाणा सरकार ने डॉ. पंकज जिला न्यायवादी को पदोन्नति देकर सहायक निदेशक (अभियोजन) बनाया है। सरकार के आदेशानुसार डॉ. पंकज सहायक निदेशक (अभियोजन) को जिला न्यायवादी करनाल का अतिरिक्त कार्यभार भी सौंपा गया है। ऐसे में उनके पास पहले की तरह जिला न्यायवादी का पद भी रहेगा।
नए कानून को लेकर करनाल जिला को रखा पायलट प्रोजेक्ट पर
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा नए कानून के क्रियान्वयन के लिए जिला करनाल को पायलट प्रोजेक्ट पर रखा गया था। जिसको जिला न्यायवादी डॉ. पंकज द्वारा बहुत ही बेहतर तरीके से नए कानूनों को जिला में क्रियान्वयन किया गया है। करनाल जिला में नए कानून क्रियान्वयन होने के उपरांत प्रदेश के अन्य जिलों में लागू किए गए। इसके अलावा 3 अक्टूबर 2025 को भारत सरकार में गृहमंत्री अमित शाह के कुरुक्षेत्र आगमन पर नए कानूनों को लेकर जो प्रदर्शनी लगाई गई थी। उस कार्य में जिला न्यायवादी डॉ. पंकज द्वारा विशेष भूमिका अदा की गई थी।
डॉ. पंकज का दबंग अधिकारी के रूप में नाम
जिला न्यायवादी डॉ. पंकज का नाम जिला में ईमानदार एवं दबंग अधिकारी के रूप में लिया जाता है। उनके कार्य में पारदर्शिता जनता का सरकारी तंत्र पर भरोसा दिलाता है। डॉ. पंकज रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के सख्त खिलाफ है। यहीं वजह है कि उन्होंने कभी गलत तरीकों का समर्थन नहीं किया। उनके लिए संविधान और कानून सर्वोपरि है। उनके द्वारा अमीर और गरीब के बीच भेदभाव न करके सभी को न्याय दिलाना सर्वोपरि है।
एनडीपीएस केसों में 2 सालों में 85 प्रतिशत आरोपियों को सजा
जिला न्यायवादी डॉ. पंकज ने करनाल रहते हुए एनडीपीएस केसों में पिछले दो सालों में आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजकर सजा करवाने का ग्राफ 85 प्रतिशत रहा। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रदेश को नशा मुक्त राज्य बनाना है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए अधिकतम केसों में आरोपियों को सजा दिलवाई गई है। जिसमें आरोपियों में कानून का भय, डर पनपा है। इससे नशे की आपराधिक गतिविधियों की जिले में गिरावट आई है। डॉ. पंकज ने कहा कि भविष्य में करनाल जिला को नशा मुक्त बनाने में सरकार के साथ हमारा प्रयास निरंतर जारी रहेगा। जिसे लेकर हम कानूनी कार्रवाई के तहत आरोपियों के खिलाफ शिकंजा कसेंगे, ताकि नशा तस्करी से जुड़े लोगों पर लगाम लग सके।
85 प्रतिशत आरोपी वीसी के माध्यम से कोर्ट में पेश
जिला करनाल में 85 प्रतिशत से अधिक जेल में बन्द आरोपियों को वीसी के माध्यम से माननीय कोर्ट में पेश किया जाता है। यहीं नहीं सरकारी गवाहों की 60 प्रतिशत गवाही वीसी के माध्यम से होती है। इसके अलावा न्यायालय में अधिकतम गवाहों की गवाही न्याय श्रुति एप्लीकेशन के माध्यम से होती है। इस एप्लीकेशन द्वारा गवाहों की गवाही को रिकार्ड भी किया जा सकता है। यहीं नहीं जिस केस में गवाही चल रही होती है, उस केस का मुकदमा नंबर इत्यादि स्क्रीन पर दिखता है। इस एप्लीकेशन से माननीय अदालत के कीमती समय की बचत होती है। सरकार की पैसों की, समय की व जनशक्ति की बचत होती है।
सहायक निदेशक (अभियोजन)-कम-जिला न्यायवादी करनाल डॉ. पंकज ने कहा कि सरकार व उच्चाधिकारियों के दिशा-निर्देशों के अनुसार अपराधियों पर लगाम लगाने का प्रयास निरंतर जारी है। कोर्ट में गवाहों व सबूतों को ठोस मजबूती के साथ पेश करते हुए आरोपियों को अधिक से अधिक सजा दिलाने का उद्देश्य रहता है। उन्होंने बताया कि सजा के प्रावधान से अपराध में संलिप्त लोगों को यह संदेश पहुंचाया जा रहा है कि किसी भी अपराध में संलिप्त होना सलाखों के पीछे पहुंचना है।
