छात्र संघ चुनाव को लेकर वर्ष 2018 में दर्ज किए गए बहुचर्चित मुकदमे में आज माननीय कुरुक्षेत्र अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए जसविंदर खैहरा, दिव्यांशु बुद्धिराजा, शाहनवाज हुसैन समेत कुल दस लोगों को सभी आरोपों से बरी कर दिया। यह फैसला वर्षों से चल रहे इस मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ है और इससे जुड़े सभी लोगों को बड़ी राहत मिली है।उक्त मामले में मंजू जाखड़, हरमन प्रीत कौर, प्रवीण वती, ज्योति जानी, विनोद कुमार, सुमन तथा तरसेम काजल भी शामिल थे। लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया, पेशियों और कानूनी लड़ाई के बाद अंततः अदालत ने तथ्यों और सबूतों के आधार पर यह स्पष्ट किया कि आरोप सिद्ध नहीं होते, जिसके चलते सभी आरोपियों को सम्मानपूर्वक बरी किया गया।गौरतलब है कि वर्ष 2018 में छात्र संघ चुनाव के दौरान विभिन्न मुद्दों को लेकर छात्रों द्वारा अपनी आवाज़ बुलंद की गई थी। इसी क्रम में यह मुकदमा दर्ज किया गया था, जो समय के साथ छात्र संघर्ष का एक प्रमुख प्रतीक बन गया। इस मामले ने न केवल संबंधित छात्रों के जीवन को प्रभावित किया, बल्कि यह छात्र राजनीति और लोकतांत्रिक अधिकारों पर भी व्यापक चर्चा का विषय रहा।आज आए इस फैसले ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि न्यायपालिका पर विश्वास बनाए रखना कितना आवश्यक है। सच और न्याय भले ही देर से सामने आएं, लेकिन अंततः उनकी जीत निश्चित होती है। यह निर्णय उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।मामले की प्रभावी और सशक्त पैरवी अधिवक्ता विक्रम मंडान और राजेंद्र चांदी द्वारा की गई। उनकी कानूनी समझ और निरंतर प्रयासों के कारण ही यह सकारात्मक परिणाम संभव हो सका। सभी साथियों ने उनके प्रति आभार व्यक्त किया।
