कुरुक्षेत्र। भारत स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रन्तिकारी एवं स्वतंत्रता सेनानी रास बिहारी बोस की जयंती पर लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल में 589 वां स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित किया गया। यह शिविर 183 बार रक्तदान, 89 बार प्लेटलेट्स और 1 बार प्लाज़्मा दान कर चुके राष्ट्रपति पुलिस पदक से विभूषित डॉ. अशोक कुमार वर्मा द्वारा आयोजित किया गया। शिविर में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान में रोबोटिक्स & इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग के हेड प्रोफेसर दीक्षित गर्ग मुख्यातिथि के रूप में पधारे हुए थे जबकि कैथल से सेवानिवृत जिला कल्याण अधिकारी सुदेश कुमार धीमान अति वशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। शिविर का शुभारम्भ रक्तदाताओं को बैज लगाकर किया गया। मुख्यातिथि पधारे राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान में रोबोटिक्स & इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग के हेड प्रोफेसर दीक्षित गर्ग ने कहा कि ऐसे अच्छे अवसरों पर स्वैच्छिक रक्तदान शिविर लगाना बहुत ही सराहनीय कार्य है। उन्होंने शिविर संयोजक डॉ. वर्मा को शिविर के लिए बधाई दी और कहा कि रक्तदाता वास्तव में जीवन दाता होता है। इससे बड़ा कोई अन्य पुण्य का कार्य नहीं हो सकता। कैथल से सेवानिवृत जिला कल्याण अधिकारी सुदेश कुमार धीमान ने स्वयं भी रक्तदान किया और कहा कि रक्तदान से व्यक्ति को स्वयं भी स्वास्थ्य लाभ होता है। शिविर संयोजक डॉ. अशोक कुमार वर्मा ने सभी रक्तदाताओं और अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे वर्ष 1989 से रक्तदान के क्षेत्र में कार्यरत हैं और राष्ट्र के सच्चे निर्माणकर्ताओं की जयंती एवं पुण्यतिथि पर रक्तदान करते भी हैं और करवा रहे हैं। उन्होंने बताया रास बिहारी बोस भारत के महान क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी थे। उनका जन्म 23 मई 1886 को बंगाल में हुआ था। वे ब्रिटिश शासन के विरुद्ध क्रांतिकारी गतिविधियों के प्रमुख नेता रहे और आगे चलकर आज़ाद हिंद आंदोलन की नींव मजबूत की। प्रमुख योगदान 1912 में तत्कालीन वायसराय लॉर्ड हार्डिंग पर हुए बम कांड से उनका नाम जुड़ा। अंग्रेज़ों की पकड़ से बचकर वे जापान चले गए। जापान में रहकर उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को अंतरराष्ट्रीय समर्थन दिलाने का कार्य किया। उन्होंने “इंडियन इंडिपेंडेंस लीग” को संगठित किया। बाद में सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व सौंपकर आज़ाद हिंद फौज के गठन का मार्ग प्रशस्त किया। रास बिहारी बोस भारत और जापान के बीच मित्रता के प्रतीक माने जाते हैं। जापान में उन्होंने भारतीय संस्कृति और स्वतंत्रता आंदोलन का प्रचार किया। वे अत्यंत साहसी, गुप्त रणनीतिकार और राष्ट्रभक्त थे। उनका निधन 21 जनवरी 1945 को जापान में हुआ। शिविर में देवेंद्र सिंगला, करमवीर, सुदेश कुमार धीमान, स्टार रक्तदाता विजय कुमार हमीदपुर, गुलाब सिंह, स्टार रक्तदाता सतीश कुमार, गौरव वर्मा, स्टार रक्तदाता संजीव राणा, मोहन लाल, दीपू, संजय वधवा सहित 15 से अधिक रक्तदाताओं ने रक्तदान करके श्रद्धांजलि अर्पित की।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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