कुरुक्षेत्र, 20 मई। उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने कहा कि हरियाणा पर्यटन निगम द्वारा ‘आओ चलें अपनी विरासत के साथ’ मुहिम के तहत हेरिटेज एंड सिटी वॉक का आयोजन 30 मई 2026 को सुबह 6 बजे से सुबह 8 बजे तक किया जाएगा। इस हेरिटेज एंड सिटी वॉक के तहत कुरुक्षेत्र में गीता स्थली ज्योतिसर तीर्थ स्थल व सरोवर,विराट स्वरूप व महाभारत अनुभव केन्द्र संग्रहालय को शामिल किया गया है।
उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य प्रदेशवासियों, विशेषकर युवाओं, विद्यार्थियों और महिलाओं को हरियाणा की समृद्ध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत से जोड़ना है, ताकि नई पीढ़ी अपने इतिहास और सांस्कृतिक मूल्यों को समझ सके तथा उनसे प्रेरणा प्राप्त कर सके। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में राज्य सरकार हरियाणा की विरासत को संरक्षित करने, उसका जीर्णोद्धार करने और उसे पर्यटन के रूप में विकसित करने की दिशा में गंभीरता से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि क्यूआर कोड और वेबसाइट के माध्यम से पंजीकरण की सुविधा, मौके पर भी रजिस्ट्रेशन करवा सकेंगे। इससे पहले पहली बार 27 सितंबर 2024 को विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर हेरिटेज वॉक का आयोजन किया गया था, जिसे लोगों का उत्साहजनक समर्थन मिला। इसी सफलता को देखते हुए अब दूसरी हैरिटेज एंड सिटी वॉक आयोजित की जा रही है और भविष्य में प्रत्येक माह इस प्रकार की वॉक आयोजित करने की योजना है, ताकि अधिक से अधिक लोग प्रदेश की विरासत से जुड़ सकें और विभिन्न ऐतिहासिक स्थलों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें।
उन्होंने बताया कि प्रति व्यक्ति 500 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है, जिसमें पानी, चाय, कॉफी, टोपी तथा अल्पाहार उपलब्ध कराया जाएगा। सभी स्थानों पर हैरिटेज गाइड की व्यवस्था भी की गई है, जो प्रतिभागियों को संबंधित स्थलों के इतिहास और महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे। उन्होंने विशेष रूप से महाभारत अनुभव केंद्र का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केंद्र विद्यार्थियों और युवाओं को महाभारत काल, भारतीय संस्कृति और इतिहास को आधुनिक माध्यमों से समझने का अवसर प्रदान करता है। यहां आने वाले युवाओं और छात्रों को भारतीय सभ्यता, संस्कृति और ऐतिहासिक घटनाओं को अनुभव के माध्यम से जानने और समझने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार की हैरिटेज वॉक का उद्देश्य केवल भ्रमण कराना नहीं, बल्कि प्रदेशवासियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत, इतिहास और परंपराओं से जोडऩा है, ताकि उन्हें सीखने, समझने और अपनी जड़ों को जानने का अवसर प्राप्त हो सके। उन्होंने कहा कि इससे विद्यार्थियों, युवाओं और महिलाओं में इतिहास और संस्कृति के प्रति रुचि बढ़ेगी और उन्हें प्रेरित किया जाएगा कि वे अपनी धरोहर को जानें और उसके संरक्षण में भागीदारी निभाएं।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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