करनाल, 14 मई। जिला में संभावित बाढ़ आपदा से निपटने की तैयारियों को लेकर वीरवार को उपायुक्त डॉ आनंद शर्मा के मार्गदर्शन में इंद्री के गांव जपती छपरा में मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। सायरन बजते ही प्रशासन अलर्ट मोड में नजर आया और तुरंत प्रभाव से बाढ़ की स्थिति से पैदा हुई आपदा में राहत कार्य में जुट गया। इस दौरान एडीसी डॉ. राहुल रईया ने प्रभावित स्थल व गांव कलसौरा के पंचायत घर में बने स्टेजिंग एरिया का दौरा करते हुए आपदा प्रबंधन का जायजा लिया। मॉक एक्सरसाइज की लाइव स्ट्रीमिंग की गई। मॉक एक्सरसाइज का सुपरविजन सेना की टीम द्वारा किया गया। इस दौरान प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, एसडीआरएफ, पुलिस, फायर विभाग, लोक निर्माण विभाग तथा अन्य विभागों ने संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव कार्यों का अभ्यास किया। मॉक ड्रिल के दौरान आपदा की स्थिति में 5 घायलों को रेस्क्यू किया गया।
जिला में आयोजित फ्लड मॉक एक्सरसाइज के दौरान भारी बारिश और बाढ़ की काल्पनिक स्थिति बनाकर राहत एवं बचाव कार्यों का अभ्यास किया गया। मॉक सीनारियो के अनुसार गांव जपती छपरा में बाढ़ का पानी खेतों में आ जाने से किसान बाढ़ के पानी में फंस गए थे। घटना के तुरंत बाद जिला प्रशासन ने इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर सक्रिय किया और एनडीआरएफ, पुलिस, फायर ब्रिगेड, स्वास्थ्य विभाग तथा अन्य एजेंसियों ने संयुक्त रूप से रेस्क्यू अभियान चलाकर किसानों को सुरक्षित बाहर निकालकर इंद्री नागरिक अस्पताल पहुंचाया, जहां गंभीर घायलों का उपचार किया गया तथा अन्य को प्राथमिक उपचार के बाद राहत केंद्र भेजा गया। राहत शिविरों में भोजन, पानी और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई तथा विभिन्न विभागों ने आपसी समन्वय के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया।
इस अवसर पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान एडीसी ने बताया कि जिला में संभावित बाढ़ आपदा से बचाव की तैयारियों के लिए आज गांव जपती छपरा में मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इस दौरान राहत कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए गांव कलसौरा में स्टेजिंग एरिया (मुख्य केंद्र) स्थापित किया गया है। यहां से सभी बचाव कार्यों की मॉनिटरिंग और समन्वय किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सुबह 10.08 बजे आपदा की सूचना का अलर्ट जारी किया गया और मात्र 14 मिनट के भीतर, सुबह 10.22 बजे राहत और बचाव दल मौके पर पहुंच गए। मॉक ड्रिल के दौरान आपदा में फंसे 5 लोगों को चिन्हित कर उनके सुरक्षित रेस्क्यू का डमी ऑपरेशन किया गया। उन्होंने बताया कि बाढ़ की दृष्टि से चिन्हित साइट पर रिटर्निंग वॉल (सुरक्षा दीवार) बनाने और आवश्यक बंदिशें लगाने का कार्य प्राथमिकता पर किया जाएगा। यह मॉक ड्रिल आपदा प्रबंधन का पहला चरण है। इसके बाद प्रशासन द्वारा आसपास के अन्य गांवों का भी दौरा किया जाएगा ताकि सुरक्षा प्रबंधों का पुख्ता जायजा लिया जा सके।
एडीसी डॉ राहुल रईया ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि वे किसी भी आपदा की स्थिति में घबराएं नहीं और अफवाहों से बचें। उन्होंने कहा कि किसान भारी बारिश व बाढ़ की स्थिति में जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से बचें। यदि कोई व्यक्ति कहीं फंस जाता है या आपात स्थिति उत्पन्न होती है, तो तुरंत जिला कंट्रोल रूम पर संपर्क कर सकता है, 10 मिनट के अंदर सहायता पहुंच जाएगी।
राहत शिविरों में उपलब्ध करवाई गई आवश्यक सुविधाएं
मॉक ड्रिल के दौरान प्रशासन द्वारा राहत शिविर स्थापित कर प्रभावित लोगों के लिए भोजन, पेयजल, प्राथमिक उपचार और आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की गई। अधिकारियों ने शिविरों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि वास्तविक आपदा की स्थिति में राहत शिविरों के माध्यम से प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता उपलब्ध करवाई जाएगी।
आपदा प्रबंधन को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क
एडीसी डॉ. राहुल रईया ने कहा कि मॉक ड्रिल का उद्देश्य केवल अभ्यास करना नहीं बल्कि सभी एजेंसियों की तैयारियों और समन्वय क्षमता का मूल्यांकन करना भी है। इससे भविष्य में किसी भी प्राकृतिक आपदा से निपटने में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन नागरिकों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है तथा किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी विभागों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।
