कुरुक्षेत्र, 13 मई। अपनी सादगी और प्राकृतिक खेती के प्रचारक के रूप में पहचाने जाने वाले गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत 14 मई वीरवार से कुरुक्षेत्र में नई पहल करने जा रहे हैं। गुजरात से कुरुक्षेत्र सामान्य रेलगाड़ी से पहुंचने के बाद गुरुकुल तक साइकिल पर यात्रा करेंगे। ऐसा करके राज्यपाल आचार्य देवव्रत आमजन को ईंधन बचाने, पर्यावरण सरंक्षण व सादगीपूर्ण जीवन शैली अपनाने का संदेश देंगे। राज्यपाल देवव्रत आर्य 14 मई को सुबह करीब 9 बजकर 30 मिनट पर रेलवे स्टेशन कुरुक्षेत्र में पहुंचेंगे।
आचार्य देवव्रत इस समय गुजरात के 20वें राज्यपाल के तौर पर पद संभाले हुए हैं। जो शिक्षाविद, समाजसेवी, वैदिक विद्वान रहे हैं। इससे पहले हरियाणा के कुरुक्षेत्र गुरुकुल के प्रधानाचार्य रहे। वर्ष 2015 से 2019 तक हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल रहे और वर्ष 2019 में गुजरात के राज्यपाल रहे। गुजरात के राज्यपाल बनते समय संस्कृत में शपथ लेकर अलग पहचान दिखाई। इसके साथ ही 11 सितंबर 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें महाराष्ट्र के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार दिया। ये तब हुआ जब सीपी राधाकृष्णन उपराष्ट्रपति चुने गए।
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने दिसंबर 2024 में कहा था कि आचार्य देवव्रत राज्यपालों के भी अगुआ हैं, यानी सबसे वरिष्ठ राज्यपाल, जो सभी राज्यपालों का नेतृत्व करते हैं। आचार्य देवव्रत ने नवंबर 2024 नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। नवंबर 2025 जनजातीय गौरव दिवस कार्यक्रम में शामिल हुए। अप्रैल 2026 भिवानी में नेचुरल फार्मिंग सेमिनार में बोले कि मोदी ने राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन शुरू किया है। आचार्य देवव्रत को आर्य समाज से जुड़ाव और लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए भी जाना जाता है। सितंबर 2025 में महाराष्ट्र का अतिरिक्त प्रभार लेने मुंबई तेजस एक्सप्रेस से गए, वीआईपी काफिला नहीं लिया। गांधीनगर से आनंद तक जीएसआरटीसी की साधारण बस में आम जनता के साथ यात्रा की।
आचार्य देवव्रत की देश में प्राकृतिक खेती के प्रचारक के रूप में बने हुए हें। राज्यपाल जो कहते हैं वह पहले करते हैं। उनका मानना है कि रसायनिक खेती दूसरे विश्व युद्ध के बाद बड़ा षड्यंत्र था। गुजरात में लाखों किसानों को प्राकृतिक खेती सिखाई।

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