कुरुक्षेत्र। श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने कहा कि वर्तमान समय में बदलती जीवनशैली और गलत खानपान के कारण अनेक बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में आयुर्वेद आधारित संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या और मानसिक संतुलन स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक है। वे विश्वविद्यालय में “स्कोप ऑफ पर्सनलाइज्ड डाइट एंड लाइफस्टाइल इन इंटीग्रेटिव मेडिसिन” विषय पर आयोजित व्याख्यान कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति की प्रकृति, आहार क्षमता और जीवनशैली अलग होती है। इसलिए आयुर्वेद में व्यक्ति विशेष के अनुसार आहार-विहार अपनाने पर विशेष जोर दिया गया है। यदि व्यक्ति अपनी प्रकृति और ऋतु के अनुसार संतुलित भोजन एवं दिनचर्या अपनाएं तो अनेक बीमारियों से बचा जा सकता है।
कुलसचिव डॉ. कृष्णकांत गुप्ता ने कहा कि आयुर्वेद आधारित संतुलित आहार, योग और स्वस्थ दिनचर्या को अपनाकर अनेक जीवनशैली जनित रोगों से बचा जा सकता है। कार्यक्रम में रिसोर्स पर्सन हारले ऑफ लंदन के संस्थापक एवं स्वास्थ्य विशेषज्ञ संजीव कुमार, डॉ. योगेश नैन तथा अग्निवेश आयुर्वेद गाजियाबाद के वैद्य विनोद शर्मा ने इंटीग्रेटिव मेडिसिन, प्रिवेंटिव हेल्थकेयर और आयुर्वेदिक जीवन शैली के महत्व पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में पहुंचने पर आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान के प्राचार्य प्रो. आशीष मेहता, कार्यक्रम संयोजक डॉ. मनीषा खत्री ने सभी का आभार व्यक्त किया।
स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर बीमारियों की रोकथाम करना बेहद जरूरी: संजीव कुमार
हारले ऑफ  लंदन के संस्थापक संजीव कुमार ने कहा कि वर्तमान समय में केवल रोगों का उपचार ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर बीमारियों की रोकथाम करना भी बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि बेहतर स्वास्थ्य के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, मानसिक शांति और सकारात्मक जीवनशैली आवश्यक है। स्वास्थ्य केवल बीमारी न होने का नाम नहीं, बल्कि शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से स्वस्थ रहने का संतुलन है। उन्होंने बताया कि देश-विदेश में कम्युनिटी आधारित वेलनेस प्रोग्राम चलाए जा रहे हैं,जिनमें संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य लोगों को केवल इलाज पर निर्भर रहने के बजाय प्रिवेंटिव हेल्थकेयर अपनाने के लिए जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद, ध्यान और सामाजिक जुड़ाव व्यक्ति के समग्र स्वास्थ्य के मूल आधार हैं। उन्होंने प्लांट-बेस्ड डाइट, लो-स्ट्रेस लाइफस्टाइल, स्ट्रेस मैनेजमेंट, इंटरमिटेंट फास्टिंग और फंक्शनल न्यूट्रिशन को बेहतर स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण बताया।

ऋतुचर्या और आहार-विहार का समन्वय स्वास्थ्य संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण: वैद्य विनोद शर्मा

अग्निवेश आयुर्वेद गाजियाबाद के वैद्य विनोद शर्मा ने कहा कि आयुर्वेद में केवल भोजन का प्रकार ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि उसकी पाचन क्षमता अर्थात् अग्नि की स्थिति सबसे अधिक महत्वपूर्ण मानी गई है। यदि अग्नि सम रहती है तो भोजन का सम्यक पाचन होकर शरीर को पोषण मिलता है,जबकि मंदाग्नि या विषमाग्नि की अवस्था में भोजन पूर्ण रूप से नहीं पचता और “आम” उत्पन्न होता है। यही आम आगे चलकर अनेक आमज व्याधियों का कारण बनता है। इसलिए आयुर्वेद में “अध्यशन” अर्थात् पूर्व भोजन के पचे बिना पुनः भोजन करने को निषिद्ध माना गया है। बार-बार या अपचित अवस्था में भोजन करने से बनने वाला रस आमरस में परिवर्तित होकर रोगों को जन्म देता है। कहा कि ऋतुचर्या और आहार-विहार का यह समन्वय शरीर में संतुलन बनाए रखने और स्वास्थ्य संरक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक माना गया है।
वैद्यों को कमान संभालनी होगी: डॉ. योगेश
डॉ.योगेश नैन ने बताया कि आज डिजिटल युग में सोशल मीडिया पर तरह-तरह के विज्ञापन दिखा लोगों को गुमराह किया जा रहा है। ऐसे समय में एक अच्छे चिकित्सक और वैद्य की आवश्यकता है, जो लोगों को गलत और सही बता सके। रोगी को जरूरत है उस अच्छे चिकित्सक की जो उसके कारण और लक्षणों को देख उसकी बीमारी का निदान करें। उसे क्या खाना चाहिए क्या नहीं, कैसे मानसिक रूप से स्वस्थ रह सकते हैं।

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