कुरुक्षेत्र। श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के आयुर्वेदिक अस्पताल में विश्व अस्थमा दिवस के अवसर पर बाल रोग विभाग द्वारा विशेष स्क्रीनिंग एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान के मार्गदर्शन में आयोजित इस शिविर में ओपीडी संख्या-53 में आए बच्चों की जांच कर अस्थमा के प्रति जागरूक किया गया।
शिविर के दौरान विशेषज्ञ चिकित्सकों ने संभावित अस्थमा लक्षणों वाले बच्चों की पीईएफ (पीक एक्सपिरेटरी फ्लो) एवं स्पाइरोमेट्री परीक्षण के माध्यम से जांच की गई, जिससे रोग की प्रारंभिक अवस्था में पहचान संभव हो सके।
कुलसचिव डॉ. कृष्णकांत गुप्ता ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ाने के साथ-साथ समय पर रोग निदान में सहायक होते हैं। उन्होंने कहा कि समाज में बढ़ती श्वसन संबंधी समस्याओं को देखते हुए इस प्रकार के शिविर अत्यंत आवश्यक हैं।
विभागाध्यक्ष प्रो. वैद्य शंभू दयाल शर्मा ने बताया कि वायु प्रदूषण, बदलती जीवनशैली और शारीरिक गतिविधियों में कमी के कारण अस्थमा के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। विशेषकर बच्चों में इसके लक्षण तेजी से देखने को मिल रहे हैं,जो गंभीर चिंता का विषय है।
प्रो. डॉ. अमित कटारिया ने बताया कि अस्थमा एक दीर्घकालिक बीमारी है,जिसे समय पर पहचान,उचित जांच और नियमित उपचार के माध्यम से नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेदिक औषधियों, प्राणायाम और ट्रिगर कारकों से बचाव के जरिए मरीज बेहतर जीवन जी सकते हैं।
डॉ. सुधीर मलिक ने बताया कि अस्थमा बच्चों के दैनिक जीवन, पढ़ाई और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। बार-बार खांसी, सांस फूलना और सीने में जकड़न के कारण उनकी परेशानी बढ़ जाती है। डॉ. जयदेव गेहिजा ने बताया कि लंबे समय तक श्वसन समस्याओं से बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है।
चिकित्सा अधीक्षक प्रो. राजा सिंगला ने अभिभावकों से अपील की कि बच्चों में सांस संबंधी किसी भी प्रकार के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत जांच कराएं, ताकि समय रहते उपचार संभव हो सके। उन्होंने बताया कि अस्पताल में ऐसे मरीजों के लिए नियमित रूप से विशेष सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
बढ़ते वायु प्रदूषण और बदलती जीवनशैली से बच्चे भी अस्थमा से पीड़ित
डॉ. राजेश वधवा
