चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) द्वारा असिस्टेंट डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी (एडीए) भर्ती प्रक्रिया को बड़ी राहत देते हुए भर्ती जारी रखने की अनुमति दे दी है, लेकिन साथ ही स्क्रीनिंग टेस्ट के स्वरूप में अहम बदलाव भी अनिवार्य कर दिया।

अदालत ने स्पष्ट किया कि अब प्रारंभिक स्क्रीनिंग परीक्षा में न्यूनतम 50 प्रतिशत प्रश्न विधि (लॉ) विषय से होंगे, जबकि शेष प्रश्न विज्ञापन में निर्धारित अन्य विषयों से पूछे जा सकेंगे। इस संशोधन के साथ अदालत ने पहले भर्ती प्रक्रिया को रद्द करने वाले सिंगल बेंच के आदेश में बदलाव कर दिया।

तीसरे चरण में इंटरव्यू पूर्व निर्धारित पैटर्न पर

जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने एचपीएससी की अपीलों का निपटारा करते हुए कहा कि आयोग तीन चरणों वाली भर्ती प्रक्रिया जारी रख सकता है। पहले चरण में वस्तुनिष्ठ प्रकार की स्क्रीनिंग परीक्षा होगी, जिसमें कानून विषय को केंद्रीय महत्व दिया जाएगा। दूसरे चरण में सब्जेक्ट नॉलेज टेस्ट और तीसरे चरण में इंटरव्यू पूर्व निर्धारित पैटर्न के अनुसार ही होंगे।

हाई कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि चूंकि स्क्रीनिंग टेस्ट केवल क्वालिफाइंग प्रकृति का होगा, इसलिए आयोग विज्ञापित पदों की संख्या से 10 गुना तक अभ्यर्थियों को दूसरे चरण यानी विषय ज्ञान परीक्षा के लिए बुलाएगा। अदालत ने यह भी साफ कर दिया कि यह व्यवस्था केवल एडीए भर्ती तक सीमित रहेगी और इसे अन्य भर्तियों के लिए नजीर नहीं माना जाएगा।

जस्टिस संदीप मोदगिल के उस फैसले को चुनौती

मामला उस समय खंडपीठ के समक्ष पहुंचा जब एचपीएससी ने जस्टिस संदीप मोदगिल के उस फैसले को चुनौती दी, जिसमें स्क्रीनिंग टेस्ट में कानून विषय शामिल न होने के कारण भर्ती प्रक्रिया को मनमाना, अव्यवहारिक और संविधान के अनुच्छेद 16(1) का उल्लंघन बताते हुए रद्द कर दिया गया था।

याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि एडीए जैसे विधिक पद के लिए प्रारंभिक स्तर पर ही कानून की समझ को परखे बिना सामान्य परीक्षा लेना योग्य उम्मीदवारों को बाहर कर सकता है।

हरियाणा के महाधिवक्ता प्रविंदर सिंह चौहान और अतिरिक्त महाधिवक्ता संजीव कौशिक ने अदालत को बताया कि लगभग 27,500 आवेदनों के कारण सभी उम्मीदवारों की सीधे विषय परीक्षा लेना व्यावहारिक नहीं था। हालांकि खंडपीठ ने माना कि एडीए पद के लिए विधिक दक्षता सर्वोपरि है और स्क्रीनिंग टेस्ट में कानून की पर्याप्त हिस्सेदारी आवश्यक है।

राज्य सरकार की ओर से स्क्रीनिंग टेस्ट में 50 प्रतिशत कानून आधारित प्रश्न शामिल करने और अधिक अभ्यर्थियों को अगले चरण में अवसर देने का प्रस्ताव रखा गया, जिसे सभी पक्षों की सहमति के बाद अदालत ने स्वीकार कर लिया। इस फैसले से हजारों अभ्यर्थियों के लिए भर्ती प्रक्रिया का रास्ता साफ हो गया।

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