-महाराजा अग्रसेन की दर्शाई आकर्षक झांकी
-राष्ट्रीय संगठन मंत्री खैराती लाल सिंगला और प्रदेश उपाध्यक्ष विशाल सिंगला ने किया अतिथियों का स्वागत
कुरुक्षेत्र,30 मार्च:- अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन की कुरुक्षेत्र इकाई द्वारा आयोजित
अग्र भगवत कथा में व्यासपीठ से राष्ट्रपति द्वारा स्वर्ण पत्र से सम्मानित अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक उज्जवल गर्ग ने प्रसंगों में अग्रवालों के 18 गोत्रों की व्याख्या विस्तारपूर्वक सुनाई। इस कथा में अग्रवाल समाज की प्रतिष्ठान विभूतियों सहित कई नगरों से अग्रवाल समाज के लोग शामिल हुए। इस दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के प्रतिनिधि कैलाश सैनी,पूर्व मंत्री एवं थानेसर विधायक अशोक अरोड़ा,पूर्व राज्यसभा सांसद ईश्वर सिंह, सैशन जज डी के मित्तल,करनाल के कंज्यूमर कोर्ट जज जसवंत सिंह और इंद्री(करनाल) से अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन के प्रदेश उपाध्यक्ष पवन कुमार सिंगला आदि अतिथियों ने विशेष रूप से शिरकत की। कथा के मुख्य यजमान अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन के राष्ट्रीय संगठन मंत्री खैराती लाल सिंगला,प्रदेश उपाध्यक्ष व श्री वैश्य अग्रवाल पंचायत, कुरुक्षेत्र के प्रधान विशाल सिंगला,जिलाध्यक्ष नवीन सिंगला और युवा जिलाध्यक्ष पीयूष बंसल ने पदाधिकारियों के साथ सभी अतिथियों का पुष्पगुच्छ देकर भव्य स्वागत किया। प्रसंगों की व्याख्या करते हुए कथावाचक उज्जवल गर्ग ने कहा कि अग्रवाल समाज में 18 गोत्रों की स्थापना महाराजा अग्रसेन ने अपने 18 पुत्रों या यज्ञों के गणाधिपतियों के नाम पर की थी। ये गोत्र अग्रवाल समाज की एकता, कुलदेवी महालक्ष्मी की आराधना और परस्पर विवाह न करने (एक ही गोत्र में) के नियमों का आधार हैं। इन्हें अक्सर ‘साढ़े सत्रह’ भी कहा जाता है, जो अहिंसा के प्रति सम्मान दर्शाता है। अग्रवालों में गर्ग सबसे प्रमुख गोत्र है जो अक्सर अग्रवंश के मूल से जुड़ा है। गोयल गोत्र सबसे आम गोत्रों में से एक है।
बंसल गोत्र समृद्धि और प्रगति का प्रतीक है।
कुच्छल समझदारी का गोत्र है।
मित्तल गोत्र समानता का प्रतीक है। सिंघल गोत्र शक्ति और मजबूती का प्रतीक है।
जिंदल गोत्र विजय और जीवंतता का प्रतीक है।
बिंदल गोत्र अटूट विश्वास का प्रतीक है।
तयाल गोत्र तेज और चपलता का प्रतीक है। मंगल गोत्र शुभ और कल्याण का प्रतीक है।
धारण गोत्र स्थिरता का प्रतीक है। ऐरण गोत्र उच्चता का प्र%A
