उमेश भार्गव, अंबाला शहर। रसोई में हर दिन चलने वाली और विदेश तक अंबाला का नाम पहुंचाने वाली मिक्सी पश्चिमी देशों में युद्ध के कारण संकट में है। यही शहर है, जिसने देश को पहली मिक्सी दी। अब यही उद्योग कच्चे माल की महंगाई और वैश्विक हालात के दबाव में हांफता नजर आ रहा है।
करीब 200 छोटी-बड़ी इकाइयां मिक्सी, जूसर, ग्राइंडर और चापर बनाती हैं। इनके साथ जिले के 150 से ज्यादा ट्रेडर्स जुड़े हैं और सालाना कारोबार करीब 250 करोड़ रुपये तक पहुंचता है। इससे करीब 15 हजार परिवारों की रोजी-रोटी सीधी जुड़ी है।
युद्ध लंबा चला तो इनका सभी पर और अधिक संकट आना तय है। यहां निर्मित मिक्सी न केवल प्रदेश और देश, बल्कि विदेश तक जाती है। कच्चे माल के रेट लगभग दोगुने होने से 15 प्रतिशत तक रेट में बढ़ाने पड़े हैं।
अंबाला शहर की मिक्सी फैक्ट्री में काम करता हुआ कर्मी।
कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। ट्रांसपोर्ट महंगा हो गया है। निर्यात प्रभावित हुआ है। यहां की मिक्सी युगांडा, दुबई और कतर समेत कई देशों में भेजी जाती है। अफ्रीकी देशों में भी यहीं से सप्लाई होती है। मौजूदा हालात में निर्यात प्रभावित हो गया है। इससे कारोबारियों के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। लागत बढ़ रही है, दूसरी तरफ बाजार सिकुड़ रहा है।
ये पड़ेगा असर
उद्योग कमजोर हुए तो उद्यमियों और श्रमिकों की आय पर पड़ेगा सीधा असर।
देश को पहली मिक्सी देने वाले शहर की 200 से ज्यादा इकाइयां प्रभावित।
15 हजार परिवार प्रभावित, कच्चे माल की कीमतें बढ़ी तो घटी रफ्तार।
300 पुर्जे लगते, हर पुर्जा महंगा
एक मिक्सी में 300 से अधिक पुर्जे लगते हैं। इनमें स्टील, बुश, बेयरिंग, तांबे की तार, प्लास्टिक पाउडर, स्टेनलेस स्टील जार, स्टील के ब्लेड, स्टील शाफ्ट, क्यूटेटर, मोटर वाइंडिंग, तार, स्टेंपिंग, लेमिनेशन, रबड़ पार्ट्स विभिन्न प्रकार के नट और बोल्ट जिसमें स्टेनलेस स्टील, ब्रास एल्युमीनियम, सभी प्रकार की धातु के नट, वाशर, तारों को पक्का करने के लिए वार्निश शामिल हैं। हालात यह हैं कि हर स्तर पर लागत बढ़ चुकी है।
उद्यमियों की चुनौतियां
यह उद्योग लघु इकाइयों पर आधारित है, जहां लाभ सीमित होता है। दाम ज्यादा बढ़ाए जाते हैं तो बाजार में मांग घटने का खतरा है, और अगर नहीं बढ़ाए जाते तो नुकसान उठाना पड़ रहा है। यदि उत्पाद की गुणवत्ता घटाते हैं तो बाजार में टिके रहना मुश्किल हो जाएगा।
मिक्सी उद्यमियों के लिए इस समय दाम नियंत्रित रखना चुनौती हो गया है। सारे कच्चे माल के दाम लगभग दोगुने हो चुके हैं। यदि पश्चिम-एशिया तनाव ज्यादा लंबा चला तो मिक्सी उद्योग बहुत संकट में चला जाएगा। -शुभम मित्तल, मिक्सी फैक्ट्री संचालक एवं सदस्य अंबाला इलेक्ट्रिकल एप्लायजेज मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन।
कच्चे माल की कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई है। इसका असर मिक्सी-जूसर, ग्राइंडर और चापर की कीमतों पर पड़ेगा। युद्ध लंबा चला तो फैक्ट्री संचालकों को कास्ट कटिंग पर विचार करना पड़ेगा। इससे जुड़े श्रमिकों पर भी असर पड़ना तय है। -एलसी गोयल, संरक्षक, अंबाला इलेक्ट्रिकल एप्लाइंसेज मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन।
