अतिरिक्त निगम आयुक्त नगर निगम का तथा उप निगम आयुक्त नगर पालिकाओं का करेंगे मूल्यांकन।
करनाल 28 फरवरी, केन्द्रीय आवासन एवं शहरी मामले मंत्रालय की एजेंसी स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 को लेकर मार्च माह में कभी भी करनाल जिला का सर्वेक्षण कर सकती है। इसे लेकर जिला नगर आयुक्त डॉ. वैशाली शर्मा ने नगर निगम की सफाई शाखा से जुड़े तमाम अधिकारियों तथा नगर पालिका सचिवों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक कर उन्हें जिम्मेदारियां सौंपी।
बैठक में उन्होंने अतिरिक्त निगम आयुक्त अशोक कुमार को निर्देश दिए कि वह स्वच्छ सर्वेक्षण को लेकर जारी की गई टूलकिट के अनुसार नगर निगम क्षेत्र का मूल्यांकन करेंगे। इसी प्रकार उप निगम आयुक्त विनोद नेहरा जिला की सभी 6 नगर पालिकाओं का दौरा कर मूल्यांकन करेंगे। उन्होंने स्वयं भी औचक निरीक्षण करने की बात कही। निरीक्षण में अधिकारी मुख्यत: दृश्यमान स्वच्छता, सामुदायिक व जन शौचालयों का रख-रखाव, मार्केट क्षेत्र व मुख्य मार्गों की साफ-सफाई, स्ट्रीट वैंडरों के पास दो डस्टबिन, कचरा संवेदनशील बिन्दू, एम.आर.एफ. सेंटर तथा पार्कों व सार्वजनिक स्थानों की साफ-सफाई की जांच करेंगे।
कचरा पृथक्करण पर दिया जोर- उन्होंने सख्त निर्देश देते कहा कि डोर टू डोर कचरा एकत्रीकरण के साथ-साथ कचरा पृथक्करण पर भी अधिक फोकस किया जाए। इसके लिए एजेंसी प्रतिनिधियों को पहले ही निर्देश जारी किए जा चुके हैं। प्रत्येक टिप्पर में विभाजन होना चाहिए और उनमें गीला व सूखा कचरा अलग-अलग ही एकत्र किया जाए। इसके अतिरिक्त टिप्पर के पीछे लाल, पीला व काला डस्टबिन लगाया जाना भी अनिवार्य किया जाए। टिप्पर चालक व सहायक, दोनो वर्दी में हों तथा प्रत्येक टिप्पर सही हालत में होना चाहिए।
गंदगी मिलने पर करें कार्रवाई- उन्होंने मुख्य सफाई निरीक्षक, जोन इंचार्ज व नगर पालिका सचिवों को निर्देश दिए कि अगर किसी बीट में गंदगी पाई जाती है या नियमित सफाई न होने की शिकायत मिलती है, तो सम्बंधित दरौगा व सफाई कर्मी की तनख्वाह काटी जाए। सभी सफाई कर्मी पूरी वर्दी में होने अनिवार्य हैं।
बागवानी व सी एंड डी अपशिष्टï हटवाएं- उन्होंने नगर निगम व नपा अभियंताओं को निर्देश दिए कि सम्बंधित क्षेत्र में बागवानी व निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्टï दिखाई नहीं देना चाहिए। इसके लिए सभी कनिष्ठï अभियंताओं की ड्यूटी लगाई जाए। उन्होंने कहा कि पहले सम्बंधित भवन मालिक को इस प्रकार का अपशिष्टï हटाने को कहें। अगर वह नहीं हटाता तो स्वयं हटाकर उस पर जुर्माना लगाया जाए। जुर्माना न भरने पर उसके सम्पत्ति कर में उस राशि को जोड़ दिया जाएगा।
