भागवत कथा समाज में संस्कृति और सदाचार की स्थापना का सशक्त माध्यम : गोविंद मोद्गिल शास्त्री
कुरुक्षेत्र 25 फरवरी। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज के आशीर्वाद से होली पर्व के उपलक्ष्य में श्री कृष्ण कृपा गौशाला के प्रांगण में आयोजित 7 दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के प्रथम दिवस पर भव्य कलश यात्रा का आयोजन श्रद्धा और उल्लास के साथ किया गया। प्रसिद्ध कथावाचक गोविंद मोद्गिल वृंदावन वाले के सानिध्य में कलश यात्रा सलारपुर रोड स्थित ज्वाला जी मंदिर से प्रारंभ हुई। इस कलश यात्रा में भारी संख्या में महिला और पुरुष श्रद्धालुओं ने भाग लिया। सिर पर सजे कलश लिए महिलाएं मंगल गीत गाते हुए शोभायात्रा में शामिल हुई, जिससे सारा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज की प्रेरणा से गौ संरक्षण हेतु आयोजित इस भागवत कथा की कलश यात्रा में श्रद्धालुओं ने श्रीमद् भागवत जी को शिरोधार्य किया। ठाकुर जी की पालकी शोभायात्रा में आकर्षण का केंद्र रही। ज्वाला जी मंदिर से प्रारंभ होकर शोभा यात्रा सलारपुर रोड़, बीआर चौंक, गीता ज्ञान संस्थानम से होते हुए श्री कृष्ण कृपा गौशाला के प्रांगण में पहुंची। इस शोभायात्रा का फूल बरसाकर श्रद्धालुओं ने स्वागत किया। बैंड-बाजों और ढोल-नगाड़ों की धुन पर भक्त जन नाचते गाते चल रहे थे।
कथा स्थल पर पहुंचकर प्रथम दिन कलश स्थापना, दीप प्रज्जवलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। भाजपा के जिलाध्यक्ष तेजेन्द्र सिंह गोल्डी ने दीप प्रज्वलित करके श्रीमद भागवत कथा का शुभारंभ किया।
व्यासपीठ से कथा वाचक गोविंद मोद्गिल शास्त्री महाराज ने श्रीमद् भागवत महापुराण की महिमा का रसपूर्ण वर्णन करते हुए प्रथम दिवस की कथा प्रारंभ की। उन्होंने कहा कि श्रीमद भागवत वो है, जिसे पढ़ने से लक्ष्मी का भंडार आता है, श्रीमद भागवत कथा समाज में धर्म संस्कृति और सदाचार की स्थापना का सशक्त माध्यम है। इस अवसर पर वात्सल्य वाटिका के संचालक हरि ओमदास परिव्राजक, श्री कृष्ण कृपा गौशाला के प्रधान सुनील वत्स, संरक्षक पवन भारद्वाज, मंगत राम जिंदल, हंसराज सिंगला, पवन शर्मा, रमाकांत शर्मा, विजय बवेजा, केके कौशल, विजय नरूला, रामकुमार शर्मा, विकास छाबड़ा, सुरेन्द्र धमीजा, कृष्ण लाल पुंडरी, सविता वत्स, सविता धवन, ममता आहूजा, मिथलेश, अनु  माल्यान , मीनाक्षी नरूला, रजनी तलवाड़ सहित श्री कृष्ण कृपा जीओ गीता परिवार के अनेक प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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