, पानीपत। अब प्राइवेट या कमर्शियल वाहनों के फिटनेस सर्टिफिकेट के लिए आरटीए कार्यालय के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। नए वाहनों का दो साल का फिटनेस सर्टिफिकेट कंपनी की ओर ही जारी किया जाएगा।

इससे पहले यह अधिकारी प्रशासनिक अधिकारियों के पास था। लेकिन नियमों में किए गए बदलावों के बाद अब यह जिम्मेदारी संबंधित कंपनी को सौंपी गई है। इसका सबसे बड़ा फायदा लोगों को यह मिलेगा कि उन्हें फाइल तैयार करने व प्राेसेस कराने के लिए धक्के नहीं खाने पड़ेगे।

लेकिन तीसरे साल गाड़ी की पासिंग करवाने के लिए उस गाड़ी को अधिकारियों के सामने लेकर आना होगा। उसकी फिटनेस चेक करके ही पास की जाएंगी।

एसेंबल किए गए व्हीकल को छूट नहीं

नई वाहन पालिसी के मुताबिक यह सुविधा उन वाहनों पर लागू नहीं होगी जिनकी चेसी ली गई हो और उन्होंने उसकी बाडी बाहर से लगवाई हो। कंपनी की ओर से प्रापर गाड़ी पर ही दो साल की पासिंग अथारिटी कंपनियों को सौंपी गई है।

एसेंबल किए गए वाहनों की पासिंग के लिए उन्हे साइट पर आना अनिवार्य होगा। इस संदर्भ में परिवहन संबंधित विभागों के पास पत्र पहुंच चुके हैं और वह वाहन संचालकों को नए नियमों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

पानीपत में सप्ताह में दो बार वाहनों की पासिंग की जाती है। इस दौरान जिन वाहनों में खामियां पाई जाती हैं उनको नियम पूरे करवाने को कहा जाता है।

जानिये ये भी होगा फायदा?

कई बार शोरूम से निकलने वाले वाहनों की फिटनेस पर भी सवाल खड़े हो जाते हैं। जिस कंपनी का व्हीकल है, उसकी फिटनेस उस कंपनी की तरफ से जारी करने के आदेश है। इसका फायदा है कि व्हीकल में किसी प्रकार की कमी नजर आती है वह मैकेनिक उसको ठीक करके फिटनेस सर्टिफिकेट जारी कर सकते हैं।

जिले में ही खरीदे वाहन और उसी जिले में वह वाहन रजिस्टर्ड होता है तो वाहन निर्माता कंपनी ही उसकी फिटनेस पास करके रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। इससे वाहन संचालक ने कागज तैयार करने के लिए अलग-अलग दफ्तरों में चक्कर नहीं लगाने पड़ते।

कंपनी को ही फिटनेस की पॉवर देने से जिम्मेदारी भी कंपनी की तय की गई है। यदि कंपनी के कर्मचारियों ने मिलीभगत करके वाहन पास कर दिया और समय अवधि के दौरान उस व्हीकल से कोई हादसा हो जाता है तो उसकी जांच में पासिंग संबंधित फाल्ट मिलता है तो उस वाहन निर्माता कंपनी पर मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कार्रवाई करने का प्रविधान है।

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