जी एम एन कॉलेज, अंबाला छावनी के रसायन विभाग और आई के एस सेल द्वारा आज प्राचीन भारतीय धातु कर्म तकनीक के विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य भारतीय संस्कृति में धातु कर्म विज्ञान के योगदान और इसकी प्राचीन तकनीक को छात्रों और शिक्षकों के बीच प्रसारित करना था। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ सतीश कुमार, एसोसिएट प्रोफेसर ,रसायन विभाग आई.आई.एच एस( के.यू.के) ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। डॉ सतीश कुमार ने प्राचीन भारतीय धातु कर्म की तकनीक पर प्रकाश डालते हुए बताया कि किस प्रकार भारतीय संस्कृति में धातुओं की खोज, परिष्करण और अनुप्रयोग का वैज्ञानिक दृष्टिकोण सदियों से विकसित हुआ है। उन्होंने लोहे,तांबे कांसे और अन्य धातुओं के शोध और उनके प्राचीन उपयोगो पर विस्तार से चर्चा की  उन्होंने छात्रों को प्राचीन तकनीक के पीछे के वैज्ञानिक तथ्यों को समझने और उनसे प्रेरणा लेने के लिए प्रोत्साहित किया। कार्यशाला में समन्वयक की भूमिका डॉ.नेहा अग्रवाल ने निभाई तो वही कार्यशाला की संयोजिका डॉ अंशु चौधरी रही जिन्होंने पूरी कार्यशाला को सुचारू रूप से संचालित किया तो वहीं मंच संचालन डॉ अनीश के द्वारा किया गया। कॉलेज प्राचार्य डॉ रोहित दत्त ने जानकारी देते हुए बताया कि इस तरह की कार्यशालाएं हमारे प्राचीन ज्ञान और सांस्कृतिक धरोहर को आधुनिक पीढ़ी तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ सीमा कंसल और डॉ सी.पी पूनिया ने मुख्य अतिथि का स्वागत पुष्पगुच्छ भेंट कर किया। इस कार्यशाला में रसायन विभाग के छात्र-छात्राओं के साथ ही कॉलेज के आई.के.एस सदस्य डॉ जसवीर कौर, प्रियंका बल्दिया ने भी भाग लिया ।इस कार्यशाला में लगभग 70 विद्यार्थियों ने भाग लिया।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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