सरकार वर्गीकरण में सर्वोच्च न्यायालय के एक अगस्त 2024 को आए निर्णय की करे पालना – डा. मनजीत दहिया
चण्डीगढ़, 09 नवम्बर। शनिवार को हरियाणा की प्रख्यात सामाजिक संस्था हरियाणा अम्बेडकर संघर्ष समिति एवं भारतीय अनुसूचित जाति पिछड़ा एकता मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. मनजीत सिंह दहिया ने  प्रदेश में अनुसूचित जातियों के वर्गीकरण के मुद्दे पर संत शिरोमणि श्री गुरू रविदास महासभा हिसार के प्रधान शिशपाल चाहलिया के उस ब्यान का समर्थन किया है जिसमें उन्होंने सी.एम. से मांग की है कि हम वर्गीकरण के विरोध में नहीं है बल्कि हमारी मांग वंचित सूची में उन जातियों को रखने की है जिनका सरकारी नौकरियों में प्रतिनिधित्व 0.50 प्रतिशत से कम है। समिति के प्रदेश अध्यक्ष डा. मनजीत सिंह दहिया ने बताया कि इस मांग को लेकर शीघ्र ही समिति का एक प्रतिनिधि मण्डल देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मिलेगा। उन्होंने बताया कि मुख्य सचिव हरियाणा सरकार के 6 नवम्बर 2007 को जारी पत्र क्रमांक 22/92/2007-3जीएस-तृतीय और 23 जुलाई 2008 को जारी पत्र के अनुसार 9 नवम्बर 1994 से 7 जून 2007 तक अनुसूचित जाति के व्यक्तियों की नियुक्तियां वर्गीकरण के आधार पर हुई थी इनमें ब्लॉक-ए की 36 जातियों में से सिर्फ 16 और ब्लॉक-बी 15 जातियों में से केवल 7 जाति के लोग ही सरकारी नौकरी में आ पाए। दोनों वर्गो की 28 जातियों के लोगों का सरकारी नौकरी में एक भी कर्मचारी नहीं लगा। भारत की जनगणना 2011 में दर्शाई गई अनुसूचित जातियों की जनसंख्या एवं मुख्य सचिव हरियाणा सरकार के 14 दिसम्बर 2017 के पत्र 22/90/2016-आईजी-3-द्वितीय के अनुसार बताई गई अनुसूचित जाति के कर्मचारियों की संख्या का आंकलन करने से यह स्पष्ट होता है कि जिन जातियों का सरकारी सेवा में प्रतिनिधित्व 0.50 प्रतिशत से कम है। सिर्फ इन 15 जातियों को ही वंचित अनुसूचित जाति की सूची में शामिल किया जाए जिन जातियों को प्रतिनिधित्व 0.50 प्रतिशत अधिक है, उन 22 जातियों को वंचित अनुसूचित जाति की सूची में शामिल ना किया जाए। डा. मनजीत सिंह दहिया ने बताया कि ऐसा करने पर ही वंचित अनुसूचित जाति को आरक्षण का लाभ मिल पाएगा, अगर मात्र द्वेष भावना से ग्रसित होकर सिर्फ एक रविदासिया जाति अथवा इसकी उपजातियों को ही वंचित अनुसूचित जाति की सूची से बहार किया जाता है और जिन जातियों का सरकारी सेवा में प्रतिनिधित्व जनसंख्या के अनुपात में रविदासिया जातियांे से अधिक या समक्ष है उन्हें वंचित अनुसूचित जाति की सूची में शामिल किया जाता है तो यह एक अगस्त, 2024 को आए सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय की उल्लंघना होगी जिसे रविदासिया समाज सहन नहीं करेगा। उन्होंने बताया कि समिति संत शिरोमणि श्री गुरू रविदास महासभा हिसार के प्रधान शिशपाल चाहरिया व पूरी कमेटी के साथ है और जो भी निर्णय होगा वह पूरे प्रदेश में मान्य होगा। उन्होंने बताया कि समिति का प्रतिनिधि मण्डल प्रधानमंत्री तथा सी.एम. से यह भी मांग करेगा कि भारत सरकार के जनगणना आयुक्त के 8 अक्टूबर 2024 के पत्र 9-7-2019-सीडी (सीईएन) के अनुसार वर्ष 2025 में नई जनगणना करवाया जाना प्रस्तावित है और कर्मचारियों के वर्तमान आंकड़े भी विभागों से एकत्रित किए जाने बाकि है। ये दोनों प्रकार के आंकड़े प्राप्त किए बिना वर्गीकरण लागू करना सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के विरूद्ध होगा। अगर हरियाणा सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा लगाई गई शर्तो के खिलाफ जाकर वर्गीकरण किया तो संत शिरोमणि श्री गुरू रविदास महासभा हिसार व अम्बेडकर संघर्ष समिति इसके लिए संघर्ष करेगी।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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