श्री दुर्गा देवी मन्दिर पिपली (कुरुक्षेत्र ) के अध्य्क्ष ज्योतिष व वास्तु आचार्य डॉ.सुरेश मिश्रा ने बताया कि नवरात्रि का पर्व देवी शक्ति मां दुर्गा की उपासना का उत्सव है। नवरात्रि में अष्टमी व नवमी तिथि एक ही दिन मनेगी। जिसके पीछे का कारण तिथियों का घटना व बढ़ना है। अष्टमी का प्रारंभ 10 अक्टूबर 2024, गुरुवार को दोपहर 12:32 बजे के बाद होगा, ऐसे में इस दिन सप्तमी तिथि भी मिल रही है। हिंदू शास्त्रों के अनुसार, सप्तमी युक्त अष्टमी तिथि का व्रत रखना वर्जित है, इसलिए अष्टमी का व्रत 11 अक्टूबर 2024, शुक्रवार को रखा जाएगा ।
पंचांग के अनुसार इस साल शारदीय नवरात्रि की अष्टमी और नवमी पूजा एक ही दिन की जाएगी। महाअष्टमी और महा नवमी पूजा 11 अक्टूबर को की जाएगी।
11 अक्टूबर को दोपहर 12:06 बजे से पहले आप अष्टमी पूजा और उसके बाद महा नवमी पूजा कर सकते हैं। इसी दिन कन्या पूजन भी किया जाएगा।
महाअष्टमी और महानवमी नवरात्रि में 9 कुंवारी कन्याओं को भोजन कराने से माता रानी की कृपा प्राप्त होती है। कन्याओं को भोजन कराने के बाद कुछ उपहार जरूर दें। ऐसा करने से घर में समृद्धि और धन-संपत्ति बनी रहेगी। विजय दशमी पर्व शनिवार,12 अक्टूबर 2024 को मनाया जायेगा।
यज्ञ के लिए आम की सूखी लकड़ी, कपूर, सुपारी, घी और मेवा जैसी सामग्री का होना आवश्यक है।
नवरात्रि में माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा का विधान होता है । अष्टमी नवरात्रि में माँ महागौरी रूप में पूजा होती है I माँ महागौरी राहु ग्रह को नियंत्रित करती हैं। विशेष पूजा से राहु के बुरे प्रभाव कम होते हैं।
नवमी नवरात्रि में माँ सिद्धिदात्री रूप में पूजा होती है I सिद्धिदात्री माँ केतु ग्रह को नियंत्रित करती हैं। विशेष पूजा से केतु के बुरे प्रभाव कम होते हैं।
अष्टमी को गुलाबी और नवमी को बैंगनी रंग के वस्त्र पूजा में पहन सकते है I घर के मुख्य द्वार पर रंगोली भी नौ दिन इन रंगो से बना सकते है I माँ दुर्गा आपकी श्रद्धा और भावना को देखती है और उसके अनुसार ही श्रेष्ठ फल प्राप्त होता है I शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि में ही भगवान श्रीराम ने माँ दुर्गा की आराधना कर महाविद्वान रावण का वध किया था और समाज को यह संदेश दिया था कि बुराई पर हमेशा अच्छाई की जीत होती है। केवल चरित्रवान ही पूजा जाता है I नारी की जहाँ भी पूजा होती है ,नारी का जहाँ भी सम्मान होता है वही सुख समृद्धि होती है और दैवी कृपा होती है I
