23 अक्टूबर को पराली में आग की 39 प्रतिशत घटनाएं अकेले राजस्थान में दर्ज की गईं ।
उत्तर भारत के कई राज्यों में धान कटाई के बाद खेतों में पराली (फसल अवशेष) जलाने का सिलसिला एक बार फिर शुरू हो गया है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) के कंसोर्टियम फॉर रिसर्च ऑन एग्रोईकोसिस्टम मॉनिटरिंग एंड मॉडलिंग फ्रॉम स्पेस (सीआरईएएमएस) द्वारा 23 अक्टूबर को जारी बुलेटिन के आंकड़ों के मुताबिक, 15 सितंबर 2026 से 23 अक्टूबर 2026 के बीच पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली और उत्तराखंड- इन सात राज्यों में कुल 1,638 स्थानों पर पराली में आग लगाने की घटनाएं दर्ज की गई हैं। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की प्रोफेसर डॉ. कुलविंदर कौर का कहना है कि जैसे-जैसे कटाई का कार्य तेजी पकड़ेगा, इन मामलों में और बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) समेत आसपास के इलाकों में वायु गुणवत्ता (Air Quality) पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है।
ये घटनाएं पंजाब, हरियाणा, यूपी, दिल्ली, राजस्थान, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश में क्रमशः 542, 14, 213, 01, 359, 102 और 407 थीं। सैटेलाइट डेटा का उपयोग करके फसल अवशेष जलाने की घटनाओं का अनुमान लगाने के लिए सैटेलाइट रिमोट सेंसिंग के जरिए धान के अवशेष जलाने से जुड़ी सक्रिय आग की घटनाओं की निगरानी की जाती है।
सैटेलाइट ने 23 अक्टूबर 2026 को सात राज्यों में फसल अवशेष जलाने की 131 घटनाएं दर्ज कीं। इस दिन पंजाब में 32, हरियाणा में 2, उत्तर प्रदेश में 20, दिल्ली में 0, राजस्थान में 51, उत्तराखंड में 19 और मध्य प्रदेश में 7 घटनाएं दर्ज की गईं। यानी 23 अक्टूबर को अकेले राजस्थान में पराली में आग की 39 प्रतिशत घटनाएं दर्ज की गईं।
सीआरईएएमएस 15 सितंबर से धान की पराली में आग की घटनाएं दर्ज करता है और समय पर बुलेटिन और डैशबोर्ड के जरिए आंकड़ों को सामने रखता है। आंकड़े बताते हैं कि 15 सितंबर से 23 अक्टूबर के बीच पराली में आग लगाने के लिए बदनाम पंजाब में कुल 542 घटनाएं दर्ज की गईं बदनाम पंजाब में 32 और हरियाणा में कुल 2 घटनाएं दर्ज की गई जो पिछले सात वर्षों में इस अवधि में राज्य में दर्ज सबसे कम घटनाएं हैं।
वहीं दूसरी तरफ धान की पराली में आग लगाने के मामले में कुछ वर्षों से पहले नंबर पर मौजूद पंजाब में अब तक 542 घटनाएं दर्ज हुई हैं। यह इस अवधि में राज्य का अब तक का अधिकतम नंबर है।
आंकड़े बताते हैं कि पंजाब और हरियाणा में धान की पराली में आग की घटनाओं में भारी कमी आई है जबकि, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में ऐसी घटनाओं में इजाफा हो रहा है। 2025 में 15 सितंबर से 30 नवंबर के बीच पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान और मध्य प्रदेश में पराली में आग की 33,028 घटनाएं दर्ज हुई थीं जिनमें 17,067 घटनाएं अकेले मध्य प्रदेश की नाम थीं। यानी छह राज्यों में दर्ज घटनाओं में 50 प्रतिशत से भी अधिक हिस्सेदारी मध्य प्रदेश की थी। पिछले साल पंजाब में 5,114, हरियाणा में 662, उत्तर प्रदेश में 7,290, दिल्ली में 5 और राजस्थान में 2,890 घटनाएं सामने आई थीं।
मध्य प्रदेश के इस उभार की वजह जलवायु संकट और कृषि की बदलती प्रवृत्ति से सीधे तौर पर जोड़ते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य प्रदेश पंजाब की राह पर चल पड़ा है। राज्य के किसान सोयाबीन, उड़द और अन्य अन्य पारंपरिक खरीफ फसलों के स्थान पर तेजी से धान को अपना रहे हैं क्योंकि मौसम की चरम परिस्थितियां धान के अलावा किसी अन्य फसलों के सामने चुनौती पेश रही हैं। राज्य के किसान धान की फसल कटने के बाद आसान तरीके के तौर पर पराली में आग लगा रहे हैं।
