करनाल, 27 अगस्त। करनाल के विकास को लेकर किए गए बड़े-बड़े दावों की पोल खोलते हुए आज जिला कांग्रेस कमेटी (शहरी), करनाल ने जोरदार रोष प्रदर्शन किया और ‘विकास की शवयात्रा’ निकालकर सत्ता के सामने जनता की पीड़ा, आक्रोश और सवालों को बुलंद आवाज दी।
इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए कहा कि जिस विकास का वर्षों से ढोल पीटा गया, आज वही विकास जनता की आंखों के सामने दम तोड़ चुका है। यह शवयात्रा किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि खोखले दावों और जमीनी हकीकत के बीच के उस फर्क के खिलाफ है, जिसने करनालवासियों को निराश और आहत किया है।
जिलाध्यक्ष पराग गाबा ने कहा कि स्मार्ट सिटी के नाम पर बड़े-बड़े दावे किए गए, लेकिन आज शहर टूटी सड़कों, गड्ढों, जलभराव, बदहाल सीवेज, गंदगी और बेकाबू यातायात से जूझ रहा है। सवाल यह है कि जब जनता को मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिल रहीं, तो आखिर विकास का पैसा और विकास के दावे कहां जा रहे हैं?
उन्होंने कहा कि आज करनाल का व्यापारी परेशान है, कर्मचारी परेशान है, युवा रोजगार के लिए दर-दर भटक रहा है और आम परिवार महंगाई की मार से कराह रहा है। सरकारी दफ्तरों में जनता सुविधाओं के लिए जाती है, लेकिन उसे बार-बार चक्कर काटने पड़ते हैं। सरकारी स्कूलों की बदहाली और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी हमारे बच्चों और मरीजों के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज जैसी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्था में सुविधाओं की कमी, सड़कों और सीवेज की बदहाली तथा वर्षों से अधूरी पड़ी योजनाएं यह पूछने को मजबूर करती हैं कि आखिर करनाल के विकास का पैसा कहां गया?
पराग गाबा ने कहा कि सांझी साइकिल, ई-रिक्शा चार्जिंग स्टेशन, सार्वजनिक शौचालय, बस क्यू शेल्टर और नाइट मार्केट जैसी योजनाओं पर खर्च हुए जनता के पैसे का हिसाब भी करनाल मांग रहा है। जनता को उद्घाटन, नारियल, फोटो और घोषणाएं नहीं चाहिएं—उसे जमीन पर दिखाई देने वाला विकास चाहिए।
दिव्यांशु बुद्धिराजा ने कहा—यह शवयात्रा विकास की नहीं, खोखले दावों की सच्चाई का आईना है
पूर्व लोकसभा प्रत्याशी दिव्यांशु बुद्धिराजा ने कहा कि आज करनाल की सड़कों पर निकली विकास की शवयात्रा उस पीड़ा और आक्रोश का प्रतीक है, जिसे शहर की जनता वर्षों से अपने सीने में दबाए बैठी थी। जिस करनाल को विकास और स्मार्ट सिटी के बड़े-बड़े सपने दिखाए गए, आज वही शहर टूटी सड़कों, गड्ढों, जलभराव, बदहाल सीवेज और अव्यवस्थित यातायात से जूझ रहा है।
उन्होंने कहा कि जनता को अब भाषणों और कागजी दावों का विकास नहीं चाहिए। उसे अपने घर के सामने, अपनी गली में, अपने बाजार में और अपने शहर में दिखाई देने वाला विकास चाहिए। जनता के पैसे से बनी योजनाओं का हिसाब जनता के सामने रखना होगा।
दिव्यांशु बुद्धिराजा ने कहा कि आज की शवयात्रा किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि उन खोखले दावों के खिलाफ जनता का प्रतिरोध है, जिनका सामना करनाल की जनता अपनी रोजमर्रा की परेशानियों के रूप में कर रही है। यह आवाज अब दबने वाली नहीं है। करनाल का नागरिक अपने अधिकारों और अपने शहर के भविष्य के लिए सवाल पूछता रहेगा।
सड़कों पर गूंजे जनता के सवाल
आज के प्रदर्शन में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जोरदार नारेबाजी करते हुए कहा—
टूटी सड़कों का हिसाब दो!
बदहाल सीवेज का हिसाब दो!
जलभराव का समाधान दो!
बेकाबू यातायात का जवाब दो!
बेरोजगार युवाओं को रोजगार का जवाब दो!
बढ़ते अपराध पर जवाब दो!
बिजली-पानी और स्वास्थ्य व्यवस्था का जवाब दो!
जनता के पैसे से बनी अधूरी योजनाओं का हिसाब दो!
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि करनाल अब खामोश नहीं रहेगा। करनाल अब सवाल पूछेगा और विकास के नाम पर किए गए हर दावे का हिसाब मांगेगा।
इस दौरान जोगिंदर वाल्मीकि, बिंदर पोसवाल, दिलशेर डाचर, तरुण चौहान, ललित आहूजा, संदीप महाजन, अशोक डाबरा, हरिराम सांबा, निश्चय सोई, पप्पू लाठर, राजेश चौधरी, हरपाल कलामपुरा, अमर सिंह रंधावा, रजत लाठर, सुमित मदान, नवनीत रंधावा, जगजीत सिंह बिट्टू, निर्मल सटोंडी, बलराज सरपंच, विनोद ततोरिया, शेर सिंह डाबड़ी, लाडी संधू, सलूजा जी, सोनी कूटेल, सुरेंद्र नंबरदार, राहुल गुप्ता, कपिल ठाकुर, रविंद्र रावल, नवजोत कश्यप, सपना राणा, शारदा सिंधु, ईशा शर्मा, रिशा नैन, अशोक दुगल, प्रवीण पूनिया, विनोद शर्मा, रमेश जोगी, पृथ्वीराज, सुरेश सैनी, नरेंद्र अगि, कृष्ण सोलंकी, रामेश्वर कश्यप, देवी सिंह और राकेश डाकवालाइन सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
आज निकली ‘विकास की शवयात्रा’ केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि करनाल की जनता के उस आक्रोश की बुलंद आवाज थी, जो अब साफ कह रही है—
“दावों का नहीं, अब जमीन पर विकास का हिसाब दो!”
