कुरुक्षेत्र, 11 अगस्त : हरियाणवी लोक संस्कृति, परम्पराओं और तीज के उल्लास से रेलवे रोड स्थित एक होटल में आयोजित सावन आयो री सखी कार्यक्रम पूरी तरह सावनमय हो गया। कला सृष्टि मंच कुरुक्षेत्र द्वारा आयोजित तीज पर्व समारोह में 30 से लेकर 82 वर्ष तक की महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपनी प्रस्तुतियों से हरियाणवी संस्कृति की समृद्ध विरासत को जीवंत कर दिया।
कार्यक्रम की पटकथा कला सृष्टि मंच के निर्देशक एवं अंतर्राष्ट्रीय कलाकार बृज किशोर शर्मा द्वारा तैयार की गई थी। कार्यक्रम में तीज के पारम्परिक गीतों, सावन के गीतों, नृत्य, शिव भजनों तथा हरियाणवी लोक परम्पराओं की सुंदर प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों को भाव-विभोर कर दिया। कार्यक्रम का विशेष आकर्षण हरियाणवी संस्कृति की पारम्परिक कोथली परम्परा रही। इस परंपरा को जीवित रखने के उद्देश्य से कला सृष्टि मंच के संरक्षक डा. जय भगवान सिंगला द्वारा अपनी धर्मपत्नी आशा सिंगला की ओर से 50 महिलाओं को कोथली प्रदान की गई। कोथली पा कर महिलाओं के चेहरे पर खुशी और उत्साह देखते ही बनता था।
ग्रामीण परिवेश एवं देहात की मूल परम्पराओं से जुड़ी महिलाओं ने तीज के पारम्परिक गीत गाकर कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। कार्यक्रम में 50 से 80 वर्ष तक की आयु की महिलाओं ने भी पूरे उत्साह के साथ अपनी प्रस्तुतियां दीं। उम्र के इस पड़ाव में भी उनके उत्साह, ऊर्जा और कला के प्रति समर्पण ने यह संदेश दिया कि संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखने के लिए उम्र कभी बाधा नहीं बनती।
दुबई से विशेष रूप से पहुंचीं अनुराधा ब्यास और उनकी बहन ने हरियाणवी नृत्य की शानदार प्रस्तुति देकर कार्यक्रम में विशेष रंग भर दिया। विदेश में रहते हुए भी हरियाणवी संस्कृति से उनका जुड़ाव उपस्थित लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। कला सृष्टि मंच के निर्देशक एवं अंतर्राष्ट्रीय कलाकार बृज किशोर शर्मा ने कहा कि हरियाणवी लोक संस्कृति केवल गीत और नृत्य नहीं, बल्कि हमारी सामाजिक परम्पराओं, रिश्तों और जीवन मूल्यों की पहचान है। सावन आयो री सखी जैसे कार्यक्रमों का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना और हमारी विलुप्त होती लोक परम्पराओं को मंच प्रदान करना है।
उन्होंने कहा कि 30 से 82 वर्ष तक की महिलाओं का एक मंच पर आकर उत्साहपूर्वक भाग लेना इस बात का प्रमाण है कि हमारी संस्कृति आज भी लोगों के दिलों में जीवित है। कला सृष्टि मंच के संरक्षक डा. जय भगवान सिंगला ने कहा कि तीज और सावन हरियाणवी संस्कृति में उमंग, प्रेम, भाईचारे और पारिवारिक रिश्तों का पर्व है। कोथली की परम्परा केवल सामान देने की परम्परा नहीं, बल्कि इसमें बहन-बेटियों के प्रति प्रेम, सम्मान और अपनत्व की भावना जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक दौर में हमारी पुरानी परंपराओं को जीवित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य से आशा सिंगला की ओर से 50 महिलाओं को कोथली प्रदान की गई, ताकि इस खूबसूरत परम्परा की मिठास आने वाली पीढ़ियों तक पहुंच सके।
कार्यक्रम में पूर्व चेयरमैन नगर परिषद उमा सुधा, राजेश सिंगला, लक्ष्मी, रमन कांता, वरिष्ठ अधिवक्ता केके.कौशिक, कृष्ण गोपाल, रेणु खुंगर, आशी खेतरपाल, अन्नपूर्णा शर्मा, सत्य भूषण, अनिल वधावन, दीपक कौशिक, मधु मौदगिल, प्रदीप शर्मा, मदन लाल, कमल अरोड़ा, मंजू सिंगला, शारदा देवी, सौरभ चौधरी, पंकज शर्मा, सहदेव, नीरज आश्री, धीरज गुलाटी, बिंदिया, डा. सुरेंद्र सहाय, ममता, नमिता कौशिक, बिमला, सपना, सरिता दहिया, राजेश जांगड़ा, स्वाति गुप्ता, हरबंस कौर, रश्मि सीकरी, सुरेंद्र सीकरी, कमला अरोड़ा, डा. अमरजीत सिंह (निर्देशक संगीत), रीत, मानवी सेतिया, सुनीता कौशिक, बिमल वशिष्ठ, विभा अग्रवाल, सुरेखा, सुनील शर्मा, स्तुति, स्नेह स्वामी, मीना गुप्ता, दीपिका सिंगला सहित अनेक गणमान्य लोग एवं कला प्रेमी मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान तीज के पारम्परिक गीतों, हरियाणवी नृत्य, शिव भजनों और लोक प्रस्तुतियों ने ऐसा समां बांधा कि पूरा वातावरण सावन आयो री सखी की भावना से सराबोर हो गया। कार्यक्रम ने न केवल तीज पर्व की खुशियों को साझा किया, बल्कि हरियाणवी लोक संस्कृति और पारम्परिक विरासत को सहेजने का प्रभावशाली संदेश भी दिया।
