कुरुक्षेत्र, 11 अगस्त। विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान में भारतीय ज्ञान संवहन कार्यक्रम पर ओरिएंटेशन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान को प्राप्त आई.के.एस. के तीसरे प्रोजेक्ट में 25 इंटर्न एवं विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में मंचासीन विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के महामंत्री देशराज शर्मा, उत्तर क्षेत्र के महामंत्री दिलाराम, संगठन मंत्री विजय नड्डा एवं संस्कृति शिक्षा संस्थान की अध्यक्षा डाॅ. ममता सचदेवा उपस्थित रहीं। इस अवसर पर संस्थान के सह सचिव डाॅ. पंकज शर्मा, कोषाध्यक्ष विरेन्द्र वालिया, सदस्य कृष्ण कुमार भंडारी, उत्तर क्षेत्र के सह-संगठन मंत्री बालकिशन एवं हिन्दू शिक्षा समिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष चेतराम शर्मा भी उपस्थित रहे। संस्थान के प्रबंधक सुधीर कुमार ने मंचासीन अतिथियों का परिचय कराते हुए बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भारतीय ज्ञान परम्परा का विशेष स्थान है। मंच संचालन करते हुए प्रोजेक्ट के सहायक अन्वेषक गौतम दत्त ने कहा कि सीखने-सिखाने की प्रक्रिया कक्षा-कक्ष के इर्द-गिर्द नहीं घूमती बल्कि उसमें बहुत सारे अनुभव भी समाहित होते हैं। प्रोजेक्ट के प्रमुख अन्वेषक डाॅ. संदीप ने पी.पी.टी. के माध्यम से प्रोजेक्ट के सभी प्रमुख बिन्दुओं से अवगत कराया। साथ ही प्रोजेक्ट की मूलभूत जानकारी एवं इसमें क्या-क्या करना है, इसकी बिन्दु रूप में व्याख्या की।
मुख्य वक्ता महामंत्री देशराज शर्मा ने आई.के.एस. के प्रोजेक्ट में सम्मिलित प्रतिभागियों एवं छात्रों का मार्गदर्शन करते हुए भारतीय ज्ञान परम्परा के अनेक पहलुओं से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में प्रत्येक विषय पर ए.आई. का प्रयोग किया जा रहा है। छात्रों को चाहिए कि वे ए.आई. का प्रयोग करने के साथ-साथ ए.आई. के डिवैल्पर भी बनें, इस पर विचार करें। उन्होंने एन.ई.पी. में निर्दिष्ट शिक्षा के प्रकार पर कहा कि यह कक्षा-कक्ष में समझ बढ़ाने के साथ-साथ चिंतन का होना चाहिए, खोज, अनुभव, चरित्र एवं समग्र विकास का होना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा में- भारत की जड़ें, आधुनिक विज्ञान की कला और वैश्विक दृष्टि को साथ लेकर चलना है। आज इस बात की नितांत आवश्यकता है कि अतीत के ज्ञान को वर्तमान में प्रश्नों के माध्यम से भविष्य की आवश्यकताओं के साथ कैसे जोड़ें। इस अवसर पर अनेक छात्रों की जिज्ञासाएं रहीं, जिनका उन्होंने समाधान किया।
कार्यक्रम में उत्तर क्षेत्र के संगठन मंत्री विजय नड्डा ने कहा कि भारतीय संस्कृति एवं शिक्षा दर्शन में बताया गया है कि बिना शोध एवं प्रयोग की शिक्षा केवल कुछ जानकारियों का कंठस्थ करना मात्र है। जब तक शिक्षा को अपने वास्तविक जीवन में नहीं उतारेंगे तो हमारे पास कितनी भी जानकारी हो, वह अधूरी है। भारतीय शिक्षा दर्शन में शिक्षा को जीवन से जोड़ने का सफल प्रयास हुआ है। उन्होंने कहा कि भारत ने व्यक्ति को केवल शरीर नहीं माना, अपितु भारतीय शिक्षा दर्शन में व्यक्ति शरीर, प्राण, मन, बुद्धि और आत्मा का सम्मिश्रण है। इनमें से एक भी चीज को अनदेखा किया तो अच्छा जीवन नहीं जी सकते। कार्यक्रम के अंत में सहायक अन्वेषक डाॅ. सुमंत कुमार ने सभी आए अतिथियों का धन्यवाद किया।
