कुरुक्षेत्र, 06 अगस्त 2026। गुरुकुल कुरुक्षेत्र ने ऊर्जा संरक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए पूरे परिसर को एलपीजी मुक्त बना दिया है। गुरुकुल परिसर में मैस, छात्रावास, स्टाफ क्वार्टर, चिकित्सालय सहित सभी प्रमुख भवनों में पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) पाइपलाइन का कार्य पूर्ण हो चुका है, जिसका विधिवत शुभारम्भ पीएनजी रेगुलेटरी बोर्ड के चेयरमैन डॉ. अनिल कुमार जैन ने किया।
इस अवसर पर गुजरात के राज्यपालश्री के ओएसडी डॉ. राजेन्द्र विद्यालंकार, गुरुकुल के व्यवस्थापक रामनिवास आर्य, लेफ्टिनेंट कर्नल कुमार अभिषेक, सीईओ वी.एस. चक्रवर्ती, अवनीत घनारा, अमन पंजेटा और साहिल भारद्वाज भी मौजूद रहे। समारोह का शुभारम्भ वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ।
गुरुकुल पहुँचने पर डॉ. राजेन्द्र विद्यालंकार ने डॉ. अनिल कुमार जैन का पुष्पगुच्छ भेंटकर आत्मीय स्वागत किया। इसके पश्चात उन्होंने अतिथि को गुरुकुल परिसर का भ्रमण कराया तथा विद्यालय, एनडीए विंग, आर्ष महाविद्यालय, अत्याधुनिक गोशाला, पौधशाला, प्राकृतिक चिकित्सालय एवं अन्य परियोजनाओं की विस्तृत जानकारी दी।
डॉ. जैन ने गुरुकुल में शिक्षा, संस्कार, स्वावलम्बन और प्रकृति आधारित जीवनशैली के समन्वित मॉडल की मुक्तकंठ से सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से गुरुकुल के संरक्षक एवं गुजरात के राज्यपालश्री आचार्य देवव्रत जी द्वारा संचालित प्राकृतिक खेती अभियान की प्रशंसा करते हुए इसे देश के लिए प्रेरणादायी बताया।
पीएनजी रेगुलेटरी बोर्ड के चेयरमैन डॉ. अनिल कुमार जैन ने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा ही विकसित भारत की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि आज देश ऊर्जा के क्षेत्र में तीव्र गति से परिवर्तन की ओर अग्रसर है और पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) इस परिवर्तन का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है।
उन्होंने कहा, “पीएनजी न केवल सुरक्षित, सुविधाजनक और किफायती ऊर्जा का स्रोत है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। जिस प्रकार प्राकृतिक खेती धरती, जल और मानव स्वास्थ्य की रक्षा करती है, उसी प्रकार स्वच्छ ईंधन के रूप में पीएनजी प्रदूषण कम करने और सतत विकास को गति देने का कार्य करती है।”
डॉ. जैन ने कहा कि आने वाले वर्षों में देश के अधिक से अधिक घर, संस्थान और औद्योगिक इकाइयाँ पीएनजी से जुड़ेंगी। उन्होंने गुरुकुल द्वारा एलपीजी से पीएनजी की ओर किया गया यह परिवर्तन दूरदर्शी एवं अनुकरणीय कदम बताते हुए कहा कि ऐसे संस्थान समाज को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से ऊर्जा संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग तथा पर्यावरण संरक्षण को अपने जीवन का संकल्प बनाने का आह्वान किया।
समारोह के अंत में डॉ. राजेन्द्र विद्यालंकार एवं रामनिवास आर्य ने डॉ. अनिल कुमार जैन को स्मृति-चिह्न एवं अंगवस्त्र भेंटकर सम्मानित किया। उपस्थित सभी अतिथियों ने गुरुकुल द्वारा स्वच्छ, सुरक्षित एवं पर्यावरण-अनुकूल ऊर्जा व्यवस्था अपनाने की इस पहल की सराहना करते हुए इसे अन्य शैक्षणिक संस्थानों के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
