कुरुक्षेत्र, 3 अगस्त। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेव के मार्गदर्शन में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का हिन्दी विभाग निरंतर भारतीय भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए समर्पित है। इसी कड़ी में राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की जयंती का आयोजन सोमवार को विभाग के गणपति चंद्र गुप्त हाल में अत्यंत श्रद्धा और गरिमा के साथ किया गया।
इस अवसर पर हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. महासिंह पूनिया ने कहा कि मैथिलीशरण गुप्त केवल एक महान कवि ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक अस्मिता और मानवीय मूल्यों के सशक्त प्रवक्ता थे। उनकी कृतियों ने भारतीय समाज में राष्ट्रप्रेम, सामाजिक समरसता, नारी सम्मान तथा कर्तव्यबोध की भावना को सुदृढ़ किया। उनकी रचनाएँ आज भी नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और नैतिक आदर्शों से जोड़ने का कार्य कर रही हैं।
प्रो. महासिंह पूनिया ने कहा कि राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त भारतीय साहित्य में देशप्रेम, राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक चेतना के सशक्त कवि माने जाते हैं। उन्होनंे बताया कि राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त हिंदी साहित्य के महान कवि थे। उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से राष्ट्रप्रेम, भारतीय संस्कृति, नारी-गरिमा तथा मानवीय मूल्यों का प्रभावशाली चित्रण किया। उनकी प्रमुख कृतियों में भारत-भारती, साकेत, यशोधरा, पंचवटी, जयद्रथ वध, विष्णुप्रिया, द्वापर, सिद्धराज, गुरुकुल, किसान, काबा और कर्बला, झंकार तथा राजा-प्रजा प्रमुख हैं। इनमें भारत-भारती ने राष्ट्रीय चेतना को जागृत किया, साकेत में उर्मिला के त्याग और आदर्श नारी-चरित्र का मार्मिक चित्रण किया गया है, जबकि यशोधरा में त्याग, धैर्य और नारी-संवेदना का अत्यंत प्रभावशाली वर्णन मिलता है। उनकी रचनाएँ आज भी भारतीय संस्कृति, देशभक्ति और मानवीय आदर्शों की प्रेरणादायक धरोहर मानी जाती हैं। इस अवसर पर विभाग के शोधार्थियों ने उनकी राष्ट्रभक्ति एवं मानवीय मूल्यों से ओत-प्रोत कविताओं का प्रभावशाली पाठ किया तथा उनके साहित्यिक अवदान और राष्ट्रीय चेतना पर अपने विचार व्यक्त किए। मंच का संचालन विनोद कुमार ने किया। इस अवसर पर डॉ. जसबीर सिंह सहित शोधार्थी एवं विद्यार्थी मौजूद थे।
